क्या 150 वर्ष की आयु तक जीवित रह सकता है व्यक्ति, जानें

Feb 16, 2023, 19:16 IST

यह जानकर आपको हैरानी हो सकती है कि शोधकर्ताओं ने एक सांख्यिकी अध्ययन में इस बात का पता लगाया है कि कोई व्यक्ति 122 साल से अधिक तक जीवित रहेगा। वहीं, यदि स्थितियां ठीक हो, तो व्यक्ति 150 साल तक जीवित रह सकता है। क्या है पूरा मामला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।    

Can a person live to age 124, 135 or 150?
Can a person live to age 124, 135 or 150?

शोधकर्तांओं के मुताबिक, एक व्यक्ति 150 साल तक भी जीवित रह सकता है। हालांकि, इसके लिए काफी चीजों का सही रहना जरूरी है। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि सदी के अंत तक कोई व्यक्ति 122 साल से अधिक तक जीवित रह सकता है। क्या कहता है शोध, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

 

बहुत कम "सुपरसेंटेनेरियन" (Supercentenarians) हैं, जो 110 वर्ष या उससे अधिक आयु तक जीवित रहते हैं. मान्यता प्राप्त रिकॉर्ड फ्रांस के Jeanne Calment का है, जो 1997 में मृत्यु के समय 122 वर्ष और 164 दिन की थी. 

इसकी कितनी संभावना है कि कोई उनके 24 वर्षीय रिकॉर्ड को तोड़ देगा, और यदि हां, तो कब? आइये जानते हैं.

शोधकर्ताओं ने एक सांख्यिकीय अध्ययन (Statistical study) में अनुमान लगाया है कि लगभग 100% संभावना है कि कोई व्यक्ति सदी के अंत तक 122 से अधिक जीवित रहेगा.

एक अन्य अध्ययन जो कि जीव विज्ञान और एक नॉवेल सूचकांक (Biology and a Novel index) पर आधारित है, ने अनुमान लगाया है कि एक इंसान के लिए 150 वर्ष की आयु तक भी जीवित रहना संभव है यदि अन्य चीजें सही हों तो.

आइये जानते हैं इस पर विभिन्न अध्ययन क्या कहते हैं

1. जर्नल डेमोग्राफिक रिसर्च में प्रकाशित दो अध्ययनों में से एक में 13 देशों में मानव जीवन की चरम सीमाओं की जांच करने के लिए सांख्यिकीय मॉडलिंग (Statistical Modelling) का उपयोग किया गया है.

यह डॉक्टरेट छात्र माइकल पियर्स (Michael Pearce) और वाशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एड्रियन राफ्टेरी (Adrian Raftery) द्वारा आयोजित किया गया था. 

2020-2100 की अवधि के लिए मृत्यु पर अधिकतम सूचित आयु के लिए उनके अनुमान इस प्रकार हैं:

122 साल: मौजूदा रिकॉर्ड के टूटने की 100% संभावना के करीब.

124 वर्ष: 99% तक की काफी संभावना है. यहां तक कि 127 वर्षों के लिए भी 68% तक जितनी अधिक संभावना है.

130 वर्ष: 13% तक की बहुत कम संभावना.

2. एक अन्य अध्ययन, नेचर कम्युनिकेशंस (Nature Communications) में प्रकाशित हुआ, जो लोगों के  रिज़िलीअन्स के लिए एक उपाय का नवाचार करता है - तनाव से उबरने की उनकी क्षमता जैसे पर्याप्त नींद न लेना, ज़ोरदार व्यायाम या बीमार पड़ना.

यह सिंगापुर स्थित बायोटेक कंपनी गेरो की एक शोध टीम द्वारा बफेलो,NY में रोसवेल पार्क कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर (Roswell Park Comprehensive Cancer Center in Buffalo, NY) के सहयोग से आयोजित किया गया था.

Gero के Tim Pyrkov के नेतृत्व में समय के साथ विषयों के रिज़िलीअन्स को मापा और अध्ययन किया गया. उनके मापों को एक्सट्रपलेशन किया, और लगभग 120-150 वर्ष की उम्र में मानव शरीर में रिज़िलीअन्स पूर्ण रूप से खत्म हो जाता है या नहीं हो पाता है.

आप को बता दें कि रिज़िलीअन्स (Resilience) को DOSI नामक सूचकांक से मापा जाता था.  Pyrkov ने इसे एक जैविक आयु माप के रूप में वर्णित किया, जो केवल सबसे किफायती ब्लड टेस्ट यानी पूर्ण ब्लड काउंट्स पर आधारित है.

100 तक जीवित रहने वाले लोगों की संख्या वर्षों से बढ़ रही है, लेकिन सुपरसेंटेनेरियन (Supercentenarians) की संख्या  यानी वो जो 110 को पार करते हैं अपेक्षाकृत कम है.

3. यह गणना करने के लिए कि वर्ष 2100 तक मानव का सबसे लंबा जीवनकाल क्या हो सकता है, वाशिंगटन विश्वविद्यालय के Pearce and Raftery ने Bayesian स्टैटिक्स नामक एक सामान्य उपकरण का उपयोग किया.

शोधकर्ताओं ने मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर डेमोग्राफिक रिसर्च द्वारा बनाए गए इंटरनेशनल डेटाबेस ऑन लॉन्गीविटी से अपने अनुमान बनाए, जो 10 यूरोपीय देशों और कनाडा, जापान और अमेरिका के सुपरसेंटेनेरियन को ट्रैक करता है.

Raftery के अनुसार "110 से 111 वर्ष की आयु तक जीवित रहने की संभावना लगभग ½ है.  उदाहरण के लिए 110 से 130 वर्ष की आयु तक लगभग मिलियन में एक है." "135 वर्ष की आयु तक जीवित रहने की संभावना 32 मिलियन में लगभग एक है." "लेकिन यह अभी भी संभव है, भले ही संभावना कम हो."

यदि Gero के नेतृत्व वाले अध्ययन में अधिक से अधिक जीवन काल का अनुमान लगाया गया है, तो इसका कारण न केवल एक अलग पद्धति है, बल्कि यह भी है कि यह बिना किसी बड़ी बीमारी वाले व्यक्तियों के लिए है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी को कोई बीमारी नहीं है, तो भी उम्र के साथ उनमें  रिज़िलीअन्स अनिवार्य रूप से कम हो जाएँगे.

जीवन काल की गणना

जीवन प्रत्याशा (Life expectancy) की गणना के लिए सबसे पुराना और अभी भी सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका गोम्पर्ट्ज़ समीकरण (Gompertz equation) पर निर्भर करता है.

 पहली बार 19वीं शताब्दी में यह अवलोकन किया गया था कि बीमारी से मानव मृत्यु दर समय के साथ तेजी से बढ़ती है. अनिवार्य रूप से, इसका मतलब है कि आपकी मृत्यु की संभावना उदाहरण के लिए कैंसर, हृदय रोग और कई संक्रमणों से हर आठ से नौ साल में लगभग दोगुनी हो जाती है.

गोम्पर्ट्ज़ गणना का उपयोग स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की गणना के लिए भी किया जाता है. 

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Source: indianexpress

Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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