मध्य प्रदेश का वह किला, जहां मिलता है ‘Zero’ का सबसे पुराना लिखित सुबूत
मध्य प्रदेश में यूं, तो कई किले मौजूद हैं। हालांकि, इन सभी में एक किला ऐसा भी है, जहां शून्य का सबसे पुराना लिखित सुबूत मिलता है। इस किले को ‘किलों का रत्न’ भी कहा जाता है। क्या है किले का नाम और इसका इतिहास, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है। यह राज्य अपने आप में भारत का समृद्ध इतिहास समेटे हुए हैं। इस इतिहास में यहां के किलों का भी योगदान रहा है, जिनमें एक किला ऐसा भी है, जो कि मध्य प्रदेश का सबसे पुराना किला है। इस किले में शून्य लिखे होने के सबसे पुराने प्रमाण मिलते हैं। इस लेख में हम इस किले की विशेषता, इतिहास और अन्य पहलूओं के बारे में जानेंगे।
कौन-सा है सबसे पुराना किला
मध्य प्रदेश का सबसे पुराना किला ग्वालियर का किला है। इस किले को अपनी भव्यता और समृद्ध इतिहास और वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि ग्वालियर किले को ‘किलों का रत्न’ भी कहा जाता है। किले का इतिहास करीब 1500 वर्ष पुराना है। इतिहास में इस किले को 'जिब्राल्टर ऑफ इंडिया' के नाम से भी जाना जाता है।
क्या कहता है किले का इतिहास
किले में मिले पुराने शिलालेखों के मुताबिक, 525 ईस्वी में हूण शासक 'मिहिरकुल' के समय में यह किला पूरी तरह अस्तित्व में आ चुका था। उस समय इस जगह को 'गोपगिरी' या 'गोपांचल' कहा जाता था।
किस-किस राजवंश ने किया है शासन
इस किले में शुरुआत में हूणों ने शासन किया था, जिनके बाद गुर्जर-प्रतिहार राजवंश आए और बाद में कच्छपघात राजवंश ने यहां शासन किया। दिल्ली सल्तनत के समय इल्तुतमिश द्वारा यहां शासन किया गया। वहीं, 14वीं-15वीं शताब्दी में तोमर राजवंश ने किले का विकास किया। यहां राजा मानसिंह तोमर ने कई बड़े महलों का निर्माण करवाया।
पानीपत का युद्ध हुआ, तो यह किला मुगलों के अधीन हो गया, जिन्होंने इसे शाही जेल के तौर पर प्रयोग किया। बाद में यह मराठा सिंधिया राजवंश के अधिकार क्षेत्र में आ गया। आपको बता दें कि 1857 की क्रांति के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने इसी किले के पास अंग्रेजों से अपनी आखिरी लड़ाई लड़ी थी।
मंदिर में मौजूद सास-बहू और तेली मंदिर
इस किले में 11वीं शताब्दी का बना सास-बहू मंदिर है। इसके साथ ही यहां तेली मंदिर भी बना हुआ है, जो कि पूरे उत्तर भारत का इकलौता मंदिर है, जिसका शिखर द्रविड़ शैली में बना है।
किले में मिलता है जीरो लिखे होने का सबसे पुराना प्रमाण
किले में सबसे पुराने जीरे लिखे होने का प्रमाण चतुर्भुज मंदिर में देखने को मिलता है। यहां एक पत्थर पर ‘0’ लिखा हुआ है, जिसमें भूमि दान और मंदिर में चढ़ने वाली 50 मालाओं के लिए जीरों का भारत में सबसे पहले लिखित रूप से प्रयोग किया गया था। यह दुनिया का दूसरा और भारत का पहला और सबसे पुराना लिखित शून्य का प्रमाण है।
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.