भारत का वह युद्ध, जिसके बाद शेर खान ने धारण की थी ‘शेरशाह’ की उपाधि
भारतीय इतिहास में आपने अलग-अलग युद्धों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। इस कड़ी में एक युद्ध ऐसा भी है, जिससे भारत में अफगान शासक रहे शेर खान ने ‘शेरशाह’ की उपाधि धारण की थी। कौन-सा था यह युद्ध, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें अलग-अलग युद्धों के बारे में पढ़ने और सुनने को मिलता है। इन युद्धों में से कुछ युद्ध का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जिससे भारत में कई बड़े योद्धाओं ने शासन किया था। इनमें से एक युद्ध ऐसा भी है, जिसके बाद भारत में अफगान शासक रहे शेर खान ने ‘शेरशाह’ की उपाधि धारण की थी। कौन-सा था यह युद्ध, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
कौन था शेरशाह सूरी
शेरशाह सूरी का नाम भारतीय इतिहास में महान शासकों में आता है। सूरी के बचपन का नाम फरीद खान था। कहा जाता है कि उन्होंने शेर को मार गिराया था, जिसके बाद दक्षिण बिहार के सूबेदार बहार खान लोहानी ने उनका नाम शेर खान रखा था। भारत में जीटी रोड बनवाने का श्रेय शेरशाह सूरी को ही जाता है।
किस युद्ध के बाद धारण की शेरशाह की उपाधि
शेरशाह सूरी ने 26 जून, 1539 में बिहार के बक्सर जिले के पास चौसा नामक स्थान पर मुगल सम्राट हुमायूं से युद्ध किया था, जिसमें हुमायूं की हार हुई थी। इस युद्ध में जीत के बाद शेर खान ने शेरशाह की उपाधि धारण की थी।
क्यों हुआ था युद्ध
शेरशाह सूरी उस समय बिहार और बंगाल जीतने के बाद अपनी ताकत बढ़ा चुका था। ऐसे में वह मुगलों को भारत से बाहर करना चाहता था। साल 1539 में हुमायूं बंगाल अभियान से दिल्ली लौट रहा था। हालांकि, हुमायूं ने शेरशाह की रणनीति को अनदेखा किया।
अचानक रात में किया हमला
हुमायूंनामा और तारीख-ए–शेरशाही में चौसा के युद्ध का वर्णन किया गया है। कहा जाता है कि कई महीनों तक दोनों सेनाएं एक-दूसरे के सामने रही थीं। इस बीच रात में जब मुगल सैनिक सो रहे थे, तब शेरशाह सूरी ने अचानक हमला कर दिया था। इससे मुगल सेना में भगदड़ मची और कई सैनिक मारे गए।
युद्ध से जुड़ा रोचक तथ्य
हुमायूंनामा में युद्ध से जुड़ रोचक तथ्य के बारे में जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक, युद्ध में अपनी जान बचाने के लिए हूमायूं अपने घोड़े के साथ नदी में कूद गया था। ऐसे में पानी पिलाने वाले एक निजाम नामक भिश्ती द्वारा हूमायूं की जान बचाई गई थी। इससे खुश होकर हूमायूं ने उस भिश्ती को एक दिन के लिए दिल्ली का सुल्तान घोषित किया था।

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क्या हुआ युद्ध का परिणाम
चौसा का युद्ध होने के बाद मुगल साम्राज्य की नींव कमजोर हो गई थी। इसके अगले वर्ष ही यानि कि 1540 में कन्नौज में युद्ध में हुआ, जिसमें हुमायूं को शेरशाह सूरी ने हरा दिया था। इसके बाद हुमायूं भारत छोड़ने पर मजबूर हो गया था। वहीं, उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य का उदय हुआ था। शेरशाह सूरी ने दिल्ली में पुराने किले में रहते हुए शासन किया था और इस दौरान पुराने किले का पुनर्निर्माण कराया था।
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