भारत का वह IAS अधिकारी, जिसकी जिद पर Voter ID Card में फोटो हो गई थी अनिवार्य, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
भारत में सभी पहचान पत्र पर फोटो अनिवार्य है। हालांकि, इसकी शुरुआत आसान नहीं थी, बल्कि इसका श्रेय मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टी.एन. शेषन को जाता है, जिन्होंने अपनी जिद पर अड़कर सभी मतादात पहचान पत्रों पर भारतीय नागरिकों की फोटो को अनिवार्य कर दिया था।
आज भारत में सभी Voter ID Card में मतदाताओं की फोटो भी होती है। हालांकि, यह शुरुआत से नहीं है। क्योंकि, पहले मतदान पहचान पत्र पर फोटो नहीं हुआ करती थी, जिससे कई बार चुनाव में फर्जी वोटिंग के मामले देखने को मिलते थे। इसे देखते हुए IAS अधिकारी और भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टी.एन. शेषन द्वारा वोटर आईडी कार्ड पर मतदाताओं की फोटो को अनिवार्य कर दिया गया था।
हालांकि, यह इतना आसान नहीं था, क्योंकि तत्कालीन सरकार ने इसका विरोध किया था, जिसके बदले में चुनाव आयुक्त द्वारा चुनाव टालने तक की बात कह दी गई थी।
कब हुई फोटो वाले वोटर आईडी की शुरुआत
टी.एन. शेषन 1990 से 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं। इस दौरान 1993 में शेषन द्वारा EPIC(Electors Photo Identity Card) को अनिवार्य किया गया। शेषन का मानना था कि जब तक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक देश में निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे।
सरकार से हुआ था टकराव
शेषन का यह फैसला एक बार में लागू नहीं हुआ, बल्कि इस फैसले का तत्कालीन सरकार और राजनीतिक दलों ने विरोध किया। सरकार ने तर्क देते हुए कहा था कि भारत में सभी नागरिकों की फोटो खींचने और लगाने में बहुत पैसे की बर्बादी होगी। इस पर टी.एन. शेषण द्वारा एपिक कार्ड न बनने पर अग्रिम तौर पर चुनाव न कराने की बात तक कह दी गई थी।
हालांकि, अंत में सरकार को झुकना पड़ा और वोटर आईडी कार्ड पर मतदाताओं की फोटो पहुंचना शुरू हो गई थी।
टी.एन. शेषन ने किये ये बड़े बदलाव
टी.एन. शेषन ने मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए कई बड़े बदलाव किये थे, जो कि निम्नलिखित हैंः
आदर्श आचार संहिता
शेषन द्वारा आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू करवाया गया था। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव प्रचार में सरकारी गाड़ियों के प्रयोग, विमान और धन के दुरुपयोग पर लगाम लगाई थी।
चुनाव खर्च की सीमा तय
शेषन ने चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार में किये जाने वाले अत्याधिक धन के उपयोग पर लगाम लगाई थी।
लाउडस्पीकर और पेंटिंग पर रोक
शेषन ने रात के समय लाडउस्पीकर बजाने और दीवारों पर चुनाव से जुड़े पोस्टर चिपकाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
शुरू की केंद्रीय बलों की तैनाती
पहले चुनाव बूथों पर स्थानीय पुलिस की तैनाती होती थी, जिससे बूथ कैप्चरिंग के मामले देखने को मिलते थे। ऐसे में शेषन ने स्थानीय पुलिस के बजाय केंद्रीय पुलिस बलों को पोलिंग बूथ पर तैनात किया।
1996 में मिला यह सम्मान
टी.एन. शेषन द्वारा चुनाव क्षेत्र में किये गए उनके सुधारों को देखते हुए 1996 में उन्हें एशिया का नोबेल कहे जाने वाले ‘रैमन मैग्सेसे पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। साल 2019 में शेषन ने अपनी अंतिम सांस ली।
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.