जानें कैसे IISc के शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया और यूरिया का उपयोग करके मंगल ग्रह की मिट्टी से बनाई ईंटें

Apr 23, 2022, 14:26 IST

Martian Space Bricks: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया और यूरिया की मदद से मंगल ग्रह की मिट्टी से ईंट बनाने का तरीका विकसित किया है. आइये इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं.

Martian Space Bricks
Martian Space Bricks

Martian Space Bricks: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सहयोग से, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के शोधकर्ताओं की एक टीम ने बैक्टीरिया और यूरिया का उपयोग करके मंगल ग्रह की मिट्टी से ईंटें बनाने की एक स्थायी विधि विकसित की है. ऐसा कहा जा रहा है कि इन 'अंतरिक्ष ईंटों' का उपयोग मंगल ग्रह पर भवन जैसी संरचनाओं के निर्माण के लिए किया जा सकता है जो लाल ग्रह पर मानव के बसने की सुविधा प्रदान कर सकते हैं.

 PLOS One में प्रकाशित एक अध्ययन में इन अंतरिक्ष ईंटों को बनाने की विधि को रेखांकित किया गया है. आइये इसकी विधि या मेथड के बारे में जानते हैं.

इन अंतरिक्ष ईंटों को बनाने की विधि क्या है?

सबसे पहले मंगल की मिट्टी को ग्वार गम (Guar Gum), स्पोरोसारसीना पेस्टुरी (Sporosarcina Pasteurii), यूरिया और निकल क्लोराइड (NiCl2) नामक जीवाणु के साथ मिलाकर एक घोल या स्लरी (Slurry) बनाई जाती है. इस घोल को किसी भी वांछित आकार के सांचों में डाला जा सकता है, और कुछ दिनों में बैक्टीरिया यूरिया को कैल्शियम कार्बोनेट के क्रिस्टल में बदल देते हैं. ये क्रिस्टल, माइक्रोब्स द्वारा स्रावित बायोपॉलिमर के साथ, मिट्टी के कणों को एक साथ रखने वाले सीमेंट के रूप में कार्य करते हैं.

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आइये अब इस मेथड के फायदे के बारे में जानते हैं 

यह विधि सुनिश्चित करती है कि ईंटें कम छिद्रपूर्ण (Porous) हों, जो कि मंगल ग्रह की ईंटों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली अन्य विधियों के साथ एक समस्या थी. 

IISc में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर आलोक कुमार और पेपर के वरिष्ठ लेखकों में से एक, आलोक कुमार ने कहा, "बैक्टीरिया अपने स्वयं के प्रोटीन का उपयोग करके कणों को एक साथ बांधते हैं, छिद्र को कम करते हैं और मजबूत ईंटों की रचना करते हैं."

Slurry-Casting Method किसके द्वारा विकसित किया गया?

IISc के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर कौशिक विश्वनाथन ( Koushik Viswanathan) की मदद से स्लरी-कास्टिंग विधि (Slurry-Casting Method) विकसित की गई थी.

अतीत में, टीम ने इसी तरह की विधि का उपयोग करके चंद्र मिट्टी से ईंटें बनाई थीं. हालांकि, पिछली विधि केवल बेलनाकार ईंटों का उत्पादन कर सकती थी, जबकि वर्तमान स्लरी-कास्टिंग विधि जटिल आकार की ईंटों का उत्पादन भी कर सकती है, विज्ञप्ति में कहा गया है. 

एक और चुनौती, मंगल ग्रह की मिट्टी की संरचना थी, जिसमें बहुत अधिक लोहा होता है जो जीवों के लिए विषाक्तता (Toxicity) का कारण बनता है. कुमार के अनुसार, “शुरुआत में, हमारे बैक्टीरिया बिल्कुल नहीं बढ़ रहे थे. मिट्टी को बैक्टीरिया के लिए अनुकूल बनाने के लिए निकेल क्लोराइड मिलाना महत्वपूर्ण कदम था."

टीम अब इस बात की जांच करने के लिए कोशिश करेगी  कि मंगल ग्रह का वातावरण कम गुरुत्वाकर्षण के साथ 'अंतरिक्ष की ईंटों' को कैसे प्रभावित करता है.

विज्ञप्ति में ऐसा भी कहा गया है कि मंगल ग्रह का वातावरण पृथ्वी की तुलना में सौ गुना पतला है, और इसमें 95% से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड है, जो बैक्टीरिया के विकास को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है. 

शोधकर्ताओं ने किस उपकरण का निर्माण किया है और क्यों?

लाल ग्रह पर स्थितियों को फिर से बनाने के लिए, शोधकर्ताओं ने एक उपकरण-MARS (मार्टियन एटमॉस्फियर सिम्युलेटर) (Martian AtmospheRe Simulator) का निर्माण किया है.

विज्ञप्ति के अनुसार, टीम ने एक लैब-ऑन-ए-चिप डिवाइस (Lab-on-a-chip device) भी विकसित किया है जिसका उद्देश्य सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों (Micro-Gravity Conditions) में बैक्टीरिया की गतिविधि को मापना है.

डीबीटी-बायोकेयर (DBT-BioCARe) की रश्मि दीक्षित ने कहा, "निकट भविष्य में सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में प्रयोग करने के हमारे इरादे को ध्यान में रखते हुए डिवाइस को विकसित किया जा रहा है."

ISRO की मदद से टीम ने ऐसे उपकरणों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई है, ताकि वे बैक्टीरिया के विकास पर कम गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव का अध्ययन कर सकें.

Source: thehindu, indianexpress

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Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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