संविधान के ये 20 अनुच्छेद माने जाते हैं राजव्यवस्था की रीढ़, अभी जान लें
भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, जो कि 2 साल 11 महीने और 18 दिनों में तैयार किया गया था। इसमें लिखे 20 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो कि भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रीढ़ माने जाते हैं। इस लेख में हम विस्तार से इन अनुच्छेदों के बारे में जानेंगे।
भारत का संविधान अलग-अलग देशों के संविधानों से मिलकर बना है। इसे तैयार करने में कुल 2 साल 11 महीने और 18 दिनों का समय लगा था। संविधान में लिखे अनुच्छेदों को भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के अधिकारों की रीढ़ कहा जाता है। हालांकि, इनमें से 20 अनुच्छेद ऐसे हैं, जिनके बारे में आम नागरिकों को भी जानकारी होनी चाहिए। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
मौलिक अधिकार कौन-से हैं
संविधान में समानता के अधिकार से लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है, जो कि इस प्रकार हैः
अनुच्छेद 14(समानता का अधिकार)
यह अनुच्छेद कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है। इसके तहत सभी नागरिक कानून की नजर में समान रहेंगे।
अनुच्छेद 17(अस्पृश्यता का अंत)
यह भारत में छुआछूत को खत्म करता है। ऐसा करना एक दंडनीय अपराध है।
अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता)
इसमें बोलने से लेकर, सभा करने, संगठन बनाने और भारत में कहीं भी घूमनी की आजादी का वर्णन किया गया है।
अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार)
यह महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद है, जो कि कहता है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या निजी स्वतंत्रता से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना वंचित नहीं किया जा सकता है।
अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार)
यह अनुच्छेद 86वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, जो कि 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार)
इस संविधान को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने "संविधान की आत्मा और हृदय" कहा था। इसके तहत नागरिक अपने अधिकारों के हनन होने पर सीधे सुप्रीम कोर्ट का रूख कर सकता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता - UCC)
यह अनुच्छेद राज्य को पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक जैसी नागरिक संहिता को लागू करने का वर्णन करता है।
अनुच्छेद 51A (मौलिक कर्तव्य)
यह नागरिकों के 11 मूल कर्तव्यों के बारे में है, जैसे राष्ट्रध्वज का सम्मान करना और पर्यावरण की रक्षा करना आदि।
अनुच्छेद 52 (भारत के राष्ट्रपति)
इसके तहत भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 61 (महाभियोग)
यह राष्ट्रपति को संविधान के उल्लंघन के आधार पर पद से हटाने की प्रक्रिया को बताता है।
अनुच्छेद 72 (क्षमादान की शक्ति)
यह राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के बारे में है, जिसमें अपराधी की सजा को कम करने या माफ करने की शक्ति बताई गई है।
अनुच्छेद 74 (मंत्रिपरिषद)
यह राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद के बारे में है, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है।
अनुच्छेद 76 (भारत के महान्यायवादी)
यह भारत सरकार के सर्वोच्च कानूनी अधिकारी की नियुक्ति के बारे में है।
अनुच्छेद 110 (धन विधेयक - Money Bill)
यह धन विधेयक से संबंधित है, जिसे सिर्फ लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
अनुच्छेद 124 (सुप्रीम कोर्ट)
यह भारत के सुप्रीम कोर्ट के गठन और स्थापना के बारे में है।
अनुच्छेद 143 (राष्ट्रपति की सलाह शक्ति)
यह राष्ट्रपति द्वारा कानूनी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांगने को लेकर है।
अनुच्छेद 280 (वित्त आयोग)
इसमें केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स के बंटवारे के लिए हर 5 साल में वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है।
अनुच्छेद 324 (चुनाव आयोग)
यह चुनाव आयोग से संबंधित है, जो कि चुनावों के निर्देशन और नियंत्रण के बारे में जानकारी देता है।
अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन)
यह किसी भी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था फेल होने पर वहां राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर है।
अनुच्छेद 368 (संविधान संशोधन)
यह संसद को संविधान में बदलाव या संशोधन करने का अधिकार देता है।
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