जानें Halo क्या है और नासा के हबल टेलीस्कोप से क्या ज्ञात होता है?

Sep 2, 2020, 15:35 IST

वैज्ञानिकों ने नासा (NASA) के हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) के जरिए एंड्रोमीडा गैलेक्सी (Andromeda Galaxy) के पास विशाल Halo की विस्तृत जानकारी हासिल की है. आखिर Halo क्या है? आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में अध्ययन करते हैं?

What is Halo?
What is Halo?

नासा के हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) ने एंड्रोमीडा गैलेक्सी (Andromeda Galaxy) के पास विशाल Halo की विस्तृत जानकारी हासिल की है. उन्होंने यह भी पाया कि Halo में एक स्तरित संरचना होती है, जिसमें गैस के दो मुख्य अलग-अलग गोले या शेल्स (shells) होते हैं. यह एक गैलेक्सी के आसपास के Halo का सबसे व्यापक अध्ययन है.

जैसा की हम जानते हैं कि हमारा सोलर सिस्टम मिल्की वे गैलेक्सी का हिस्सा है. वैज्ञानिकों को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि प्लाज्मा का फैलने वाला यह दिखाई न देने वाला Halo, आकाशगंगा से 1.3 मिलियन प्रकाश-वर्ष तक हमारे मिल्की वे का लगभग आधा भाग और कुछ दिशाओं में 2 मिलियन प्रकाश-वर्ष तक फैला हुआ है. इसका मतलब यह है कि एंड्रोमेडा का Halo पहले से ही हमारी अपनी आकाशगंगा के Halo में टकरा रहा है.

हबल टेलीस्कोप के बारे में

हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) एक स्पेस टेलीस्कोप है जिसे 1990 में low Earth orbit में लॉन्च किया गया था और यह ऑपरेशन में है. यह हबल टेलीस्कोप, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के योगदान के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा निर्मित  है.

कुछ साल में हबल टेलीस्कोप रिटायर हो जाएगा और इसकी जगह जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) लेगा. जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST या "Webb") एक स्पेस टेलीस्कोप है जिसे हबल स्पेस टेलीस्कोप की जगह नासा के प्रमुख खगोल भौतिकी मिशन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है.

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आखिर Halo  क्या है?

एक विशाल गैसीय आवरण को Halo कहते हैं. एंड्रोमीडा गैलेक्सी का यह छोटा सा दिखाई न देने वाला Halo प्लाज्मा का बना है. यह अपनी गैलेक्सी से 13 लाख प्रकाशवर्ष की दूरी तक फैला हुआ है और कई दिशाओं में तो यह 20 लाख प्रकाशवर्ष की दूरी तक फैला है.

सूरज भी एक स्टार है और मिल्की वे गैलेक्सी में लगभग 400 बिलियन स्टार्स हैं और हो सकता है कि इससे ज्यादा प्लैनेट्स भी हों. बिलकुल मिल्की वे गैलेक्सी की तरह एंड्रोमेडा गैलेक्सी भी है इसमें भी बिलियनस में स्टार्स और प्लैनेट्स हैं. हमारा यूनिवर्स काफी ज्यादा बड़ा है. विज्ञानिकों के अनुसार आने वाले बिलियन सालों में ये दोनों गैलेक्सी टकरा जाएंगी और फिर ये दोनों गैलेक्सी मिलकर एक गैलेक्सी बन जाएंगी. कई विज्ञानिकों के अनुसार उस गैलेक्सी का नाम मिल्क ड्रोमेडा होगा. ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि ये इवेंट लगभग 4 बिलियन साल बाद होगा और क्या इसे मानव जाती देख पाएगी.  

वैज्ञानिकों द्वारा ऐसा बताया जा रहा है कि Halo हमारी गैलेक्सी यानी मिल्की वे के आधे रास्ते तक आ गया है. इसका मतलब यह है कि यह हमारी गैलेक्सी की ओर आ रहा है. एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि इस Halo की परतदार संरचना है, जिसमें दो स्पष्ट गैस के गोले हैं.

Halo कितने इम्पोर्टेन्ट होते हैं?

समैन्था बेरेक (Samantha Berek), अमेरिका के कनेक्टिकट, न्यू हेवल की येल यूनिवर्सिटी की सह अन्वेषणकर्ता ने बताया कि गैलेक्सियों के गैस के ये विशाल Halo को समझना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि गैस के इस भंडार में भविष्य में गैलेक्सी में तारों के निर्माण और सुपरनोवा जैसी घटनाओं के लिए ईंधन होता है. बेरेक के अनुसार इनमें गैलेक्सी के इतिहास और भविष्य के बारे में जानकारी के बहुत सारे संकेत भी होते हैं.
इन संकेतों के बारे में एंड्रोमीडा के गैसीय Halo में विशाल मात्रा में खोजे गए भारी तत्व (Elements) से मिलता है. ये भारी तत्व तारों के अंदर के हिस्से में बनते हैं  और तारों के मरने के बाद प्रचंडता से अंतरिक्ष में उत्सर्जित होते हैं. इसके बाद तारों के विस्फोट के कारण ये पदार्थ इस  Halo में मिल जाते हैं.

आखिर Halo में ऐसा क्या है?

इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता और अमेरिका में इंडियाना की नाट्रे डेम यूनिवर्सिटी से निकोलस लेहनर ने बताया, “हमने इस Halo के अंदर के गोले को और ज्यादा जटिल और गतिमान पाया है. इसका आकार करीब पांच लाख प्रकाश वर्ष है. वहीं इसका बाहरी गोला जटिल नहीं है लेकिन ज्यादा गर्म है. गैलेक्सी की डिस्क में सुपरनोवा की गतिविधि के कारण अंदर को Halo पर ज्यादा प्रभाव पड़ा होगा जिसकी वजह से ये अंतर आ गया होगा.

यहीं आपको बता दें कि लेहनर की टीम ने 2015 के पहले ही साल में एंड्रोमीडा गैलेक्सी का अध्ययन किया है. उस समय भी इसको उनकी टीम ने एक विशाल और भारी Halo के तौर पर देखा था. परन्तु उस समय यह कितना जटिल है के बारे में बहुत ही कम जानकारी थी. अब इसका विस्तार से मैप बन रहा है जिससे उसके सटीक आकार और भार के बारे में पता चला पाएगा.

एंड्रोमीडा गैलेक्सी के बारे में 

एंड्रोमीडा गैलेक्सी को M31 भी कहते हैं. ये हमारी गैलेक्सी के सबसे पास स्थित एक सर्पिल गैलेक्सी है जिसमें लगभग बिलियन्स में तारे होंगे और इसका आकार हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के बराबर ही माना जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह गैलेक्सी हमसे केवल 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है. 
प्रोजेक्ट AMIGA (Absorption Map of Ionized Gas in Andromeda) नामक एक अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि 43 क्वासर (quasars) से प्रकाश की जांच की ब्लैक होल द्वारा संचालित सक्रिय आकाशगंगाओं के बहुत दूर, शानदार कोर - एंड्रोमेडा से परे स्थित है. क्वासर (quasars) Halo के पीछे बिखरे हुए हैं, जिससे वैज्ञानिकों को कई क्षेत्रों की जांच करने की अनुमति मिलती है.

टेक्निकली ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि एंड्रोमेडा गैलेक्सी और मिल्की वे गैलेक्सी में टकराने की शुरुआत हो गई है. एंड्रोमेडा के पास का halo अब मिल्की वे तक आ गया है यानी collide कर रहा है. इस डिस्कवरी से यह भी ज्ञात होता है कि हर गैलेक्सी की अपनी एक Halo होती है.  वैज्ञानिकों के अनुसार इससे यह भी पता लगता है कि कैसे गैलेक्सी की फार्मेशन या संरचना होती है. 

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Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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