क्या है यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क, क्या लिस्ट में भारत से है कोई साइट? जानें यहां
यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क ऐसे क्षेत्र होते हैं, जहां करोड़ों साल पुरानी भू-वैज्ञानिक धरोहर, जीवाश्म, चट्टानें और प्राकृतिक संरचनाओं का संरक्षण किया जाता है। फिलहाल भारत में कोई भी UNESCO Global Geopark नहीं है, लेकिन मध्य प्रदेश का बाघ फॉसिल क्षेत्र समेत कई साइट्स भविष्य की संभावित लिस्ट में शामिल हो सकती हैं।
हमारी धरती करोड़ों साल पुरानी है और अपनी भू-वैज्ञानिक विविधता के लिए जानी जाती है। पृथ्वी पर कई ऐसी जगहें मौजूद हैं, जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से यूनेस्को दुनिया की खास प्राकृतिक और भू-वैज्ञानिक धरोहरों को संरक्षित करने का काम करता है। इनमें एक नाम यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का भी है, जिसकी चर्चा समय-समय पर होती रहती है। आज हम जानेंगे कि यह क्या है और भारत में ऐसी कोई साइट है या नहीं यदि नहीं तो भविष्य में इसकी क्या उम्मीद है।
UNESCO Global Geopark क्या है?
यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क (UNESCO Global Geopark) ऐसी खास जगह होती है, जहां धरती के करोड़ों साल पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास को संरक्षित किया जाता है। यहां मौजूद चट्टानें, जीवाश्म, पहाड़, घाटियां और प्राकृतिक संरचनाएं सिर्फ पर्यटन का केंद्र नहीं होतीं, बल्कि ये पृथ्वी के विकास की कहानी भी बताती हैं।
आखिर क्यों खास हैं जियोपार्क?
जियोपार्क सिर्फ पत्थरों या पहाड़ों तक सीमित नहीं होते। इनका मकसद लोगों को प्रकृति, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक करना होता है। साथ ही ये स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, पर्यटन और नई आर्थिक संभावनाएं भी पैदा करते हैं। यानी यहां प्रकृति की सुरक्षा और विकास दोनों साथ चलते हैं।
कैसे मिलता है यूनेस्को का टैग?
किसी भी जगह को यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनने के लिए वहां अंतरराष्ट्रीय महत्व की भू-वैज्ञानिक धरोहर होना जरूरी है। इसके अलावा मजबूत प्रबंधन, संरक्षण योजना, रिसर्च, शिक्षा और जियोटूरिज्म जैसी सुविधाएं भी जरूरी होती हैं। UNESCO यह भी देखता है कि स्थानीय समुदाय इस पूरी प्रक्रिया से कितना जुड़ा हुआ है।
कैसे शुरू हुई जियोपार्क की शुरुआत?
धरती की अनोखी भू-वैज्ञानिक विरासत को बचाने के लिए UNESCO ने International Geoscience and Geoparks Programme (IGGP) के तहत इस पहल की शुरुआत की। 2000 के दशक में इसे ग्लोबल पहचान मिली और धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों ने अपने खास भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों को जियोपार्क के रूप में विकसित करना शुरू किया।
टैग देने की क्या है प्रक्रिया?
सबसे पहले संबंधित देश उस क्षेत्र की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक अहमियत का विस्तृत दस्तावेज तैयार करता है। इसके बाद संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय विकास की योजना बनाई जाती है। फिर UNESCO की स्पेशल टीम उस जगह का निरीक्षण करती है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही किसी क्षेत्र को यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का दर्जा मिलता है।
क्या भारत में है कोई Geopark?
भारत के पास हिमालय, ज्वालामुखीय चट्टानों, जीवाश्म स्थलों और प्राकृतिक संरचनाओं जैसी विशाल भू-वैज्ञानिक संपदा है। बावजूद इसके, अभी तक देश के नाम एक भी यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क नहीं है। मध्य प्रदेश का बाघ फॉसिल क्षेत्र देश का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
बात दें कि यूनेस्को और Geological Survey of India (GSI) भी भारत में जियोपार्क संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग और वर्कशॉप चला रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत को उसका पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क मिल सकता है।
इस तरह के टॉपिक प्रतियोगी एग्जाम के नजरिये से बहुत ही उपयोगी होते है, इनसे जुड़े सवाल रेलवे, स्टेट लेवल के एग्जाम और लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में पूछें जाते है
Hottest Cities in India 2026: भारत के 10 शहर जहां का तापमान है सर्वाधिक? देखें IMD डेटा
Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.