‘दक्षिण भारत की दिवाली’ किस त्योहार को कहा जाता है, जानें यहां

Last Updated: Nov 7, 2026, 12:01 IST

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। इस कड़ी में यहां एक ऐसा त्योहार भी है, जिसे ‘दक्षिण भारत की दिवाली’ भी कहा जाता है। क्या आप इस त्योहार के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

दिवाली 2026
दिवाली 2026

भारत में सबसे बड़ा पर्व दिवाली का माना जाता है। यह पर्व धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज तक चलता है। इस कड़ी में हमें देशभर में दिवाली के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं। क्या आप जानते हैं कि भारत में एक त्योहार ऐसा भी है, जिसे ‘दक्षिण भारत की दिवाली’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह त्योहार और कब मनाया जाता है, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

किस त्योहार को कहते हैं ‘दक्षिण भारत की दिवाली’ 

दक्षिण भारत में कार्तिकाई दीपमको विशेष रूप से ‘दक्षिण भारत की दिवाली’ या ‘दीपों का महापर्व’ कहा जाता है। दक्षिण भारत में उत्तर भारत की तरह नरक चतुर्दशी (दीपावली) भी धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन तमिल और दक्षिण भारतीय परंपरा में जो स्थान प्रकाश, दीपों और भक्ति के लिहाज से कार्तिकाई दीपम का है, वह एकदम अलग है। यह त्योहार मुख्य रूप से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है।

कब और क्यों मनाया जाता है त्योहार

यह त्योहार तमिल पंचांग के अनुसार, 'कार्तिकाई' माह (नवंबर-दिसंबर) की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जब चंद्रमा 'कृत्तिका नक्षत्र' के साथ संयोग करता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु के अहंकार को शांत करने के लिए खुद को एक अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट किया था। इस पर्व का संबंध भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय के छह स्वरूपों और उनके पालन-पोषण करने वाली छह कृतिकाओं से भी है।

तिरुवन्नामलाई और 'महा दीपम' 

कार्तिकाई दीपम का सबसे बड़ा केंद्र तमिलनाडु का तिरुवन्नामलाई स्थित अरुणाचलेश्वर मंदिर है। इस दिन अरुणाचल पर्वत की 2,668 फीट ऊंची चोटी पर एक बड़े तांबे के पात्र में सैकड़ों किलोग्राम शुद्ध घी और कपूर की सहायता से 'महा दीपम' प्रज्ज्वलित किया जाता है। इस महादीप की लौ कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है। इसे भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग स्वरूप का साक्षात दर्शन माना जाता है, जिसे देखने लाखों श्रद्धालु आते हैं और पर्वत की परिक्रमा करते हैं।

घरों में दीपोत्सव और परंपराएं

-दीपावली की तरह ही इस दिन दक्षिण भारत में घर-घर में मिट्टी के अनगिनत दीये, जिन्हें तमिल में 'अगल विलक्कू' कहा जाता है, तेल या घी डालकर जलाए जाते हैं।

-घरों के प्रवेश द्वार और आंगनों में चावल के आटे से सुंदर कोलम बनाए जाते हैं और उनके चारों ओर दीप सजाए जाते हैं।

-यह प्रकाश पर्व अज्ञानता, अंधकार और अहंकार को दूर कर जीवन में ज्ञान, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक माना जाता है।

-इस अवसर पर भगवान को 'अप्पम', भुने हुए चावल के पोरी और गुड़ से बने विशेष मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Nov 7, 2026, 12:01 IST

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