किस मुगल सम्राट को कहा जाता था ‘जिंदा पीर’ और क्यों, जानें जवाब
भारत में मुगलों ने करीब 331 सालों तक राज किया है। इस दौरान भारत में कई मुगल सम्राट हुए, जिन्होंने अपने शासनकाल में भारत में अपने शासन का विस्तार किया। इनमें से कुछ मुगल सम्राटों को उनकी विशेषताओं की वजह से अल-अलग उपनामों से भी जाना जाता है। इस कड़ी में भारत में एक मुगल सम्राट ऐसे भी रहे हैं, जिन्हें ‘जिंदा पीर’ भी कहा जाता था। कौन थे यह मुगल सम्राट, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें अतीत के पन्नों में भारत का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास देखने को मिलता है। इन पन्नों में भारत में शासन करने वाली कई सल्तनत का इतिहास दर्ज है। इन सल्तनत में मुगल सल्तन भी शामिल है, जिन्होंने भारत में कुल 331 सालों तक शासन किया।
इस दौरान मुगल शासकों ने अपनी सीमाओं का विस्तार किया। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसे मुगल सम्राट भी रहे हैं, जिन्हें ‘जिंदा पीर’ भी कहा जाता था। कौन थे यह मुगल सम्राट, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस मुगल सम्राट को कहा जाता था ‘जिंदा पीर’
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि भारत में किस मुगल सम्राट को ‘जिंदा पीर’ भी कहा जाता था। आपको बता दें कि मुगल सम्राट औरंगजेब को जिंदा पीर भी कहा जाता था।
क्यों कहा जाता था ‘जिंदा पीर’
औरंगजेब को जिंदा पीर कहने के पीछे कई कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
सादगीपूर्ण जीवन
औरंगजेब बाकी मुगल सम्राटों की तुलना में अपने सादगीपूर्ण जीवन जीने के लिए जाना जाता था। वह विलासिता और फिजूलखर्ची से दूर रहा रहता था। औरंगजेब शाही खजाने से अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा नहीं करता था। वह खुद टोपियां सिला करने के साथ कुरान की नकल यानि कि कैलीग्राफी करता था, जिससे लोग औरंगजेब को पीर जिंदा पीर कहते थे।
शरीयत और इस्लामी नियमों का पालन
औरंगजेब ने अपने जीवनकाल में धार्मिक कट्टरता का पालन किया था। उसने अपने समय में शराब, जुआ और संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। वह दिन में पांच बार नमाज अदा करता था।
क्या होता है जिंदा पीर का अर्थ
आपको बता दें कि पीर शब्द का इस्तेमाल सूफी संतों के लिए किया जाता है, जो कि बाहरी दुनिया के दिखावे से दूर रहते हैं। वहीं, औरंगजेब सिंहासन पर बैठे होने के बाद भी अनुशासित जीवन और दिखावे से दूर रहता था। ऐसे में लोग उसे जीवित संत या जिंदा पीर कह देते थे।
रोचक तथ्य
आपको औरंगजेब से जुड़ा एक रोचक तथ्य बता दें कि औरंगजेब ने अपनी वसियत में लिखा था कि उसकी कब्र पर कोई गुंबद या भव्य इमारत न बने। ऐसे में औरंगाबाद में स्थित औरंगजेब की कब्र बहुत ही साधारण चबूतरे पर बनी हुई है और इस पर कोई गुंबद नहीं है, बल्कि यह खुले आसमान के नीचे है।
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