दिल्ली का जंतर-मंतर क्यों, कब और किसने बनवाया था, जानें यहां

Last Updated: Jul 20, 2026, 11:33 IST

इन दिनों जंतर-मंतर का नाम चर्चाओं में बना हुआ है। इसमें भी दिल्ली की जंतर-मंतर खास चर्चाओं में है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि जंतर-मंतर का निर्माण क्यों और कब और किसने किया था, यदि नहीं, तो इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।

जंतर-मंतर
जंतर-मंतर

दिल्ली का जंत-मंतर इन दिनों खास चर्चाओं में बना हुआ है। यह जगह मुख्य रूप से धरना-प्रदर्शन के लिए जानी जाती है। हालांकि, किसी समय में यह एक बहुत बड़ी वेधशाला हुआ करता था। दिल्ली में बना जंतर-मंतर सबसे पहली वेधशाला थी, जिसके बाद भारत के मथुरा, जयपुर, वाराणसी और उज्जैन में जंतर-मंतर का निर्माण किया गया था। इस लेख में हम जंतर-मंतर के बारे में विस्तार से जानेंगे।

किसने करवाया था जंतर-मंतर का निर्माण

जंतर-मंतर का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 1724 में करवाया गया था। यह वेधशाला कभी विज्ञान, गणित और खगोलशास्त्र का बड़ा केंद्र हुआ करती थी।

क्यों बनवाया गया था जंतर-मंतर 

महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय की गणित और खगोलशास्त्र में रूचि थी। उन्होंने उस समय इस इमारत का निर्माण विभिन्न कारणों से किया था, जो कि इस प्रकार हैंः

सही समय जानने के लिए हुआ निर्माण 

उस समय आज की तरह घड़ियां नहीं हुआ करती थीं। ऐसे में समय का सही पता नहीं चल पाता था। महाराजा चाहते थे कि समय का सही पता चल सके। इसके लिए जंतर-मंतर के यंत्रों को इस प्रकार डिजाइन किय गया कि वे सूरज और चांद की रोशन से सही समय बता सकते थे।

कैलेंडर को सुधारने के लिए निर्माण 

उस समय खगोलीय टेबल और कैलेंडर में बहुत-सी कमियां हो गई थीं, जिससे कई बार किसी त्योहार की सही तारीख पता नहीं चलती थी। इस वजह से ये सभी बड़े सुधार करने के लिए जंतर-मंतर का निर्माण हुआ था।

ग्रहों की स्थिति का अध्ययन के लिए हुआ निर्माण

उस समय सूरज, चांद, बुध,मंगल, गुरु और शुक्र समेत अन्य ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए जंतर-मंतर का निर्माण किया गया था।

मौसम की जानकारी के लिए उपयोगी

जंतर-मंतर उस समय सूरज और चंद्र ग्रहण के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ मौसमी दशाओं की जानकारी देने के लिए भी बहुत उपयोगी था।

जंतर-मंतर में लगे प्रमुख यंत्र

जंतर-मंतर में प्रमुख यंत्र लगे हुए हैं, जो कि समय और ग्रहों की चाल बताने के लिए उपयोगी थे। 

सम्राट यंत्र- यह सूर्य की रोशनी से समय बताने का काम करते थे।

जयप्रकाश यंत्र- इस यंत्र की मदद से तारों और ग्रहों की स्थिति के बारे में जानकारी ली जाती थी।

राम यंत्र- यह तारों की ऊंचाई और उनके एंगल मापने के लिए सिलेंड्रीकल दीवारों के रूप में बना हुआ है।

मिश्र यंत्र- इनमें अलग-अलग पांच यंत्र हैं, जिनसे साल के सबसे बड़े और सबसे छोटे दिन के बारे में जानकारी मिलती थी।


Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 20, 2026, 11:33 IST

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