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जानें वसंत पंचमी क्यों और कैसे मनायी जाती है

वसंत पंचमी एक लोकप्रिय हिन्दू त्योहार है जिसे वसंत की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है| इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है, पीले रंग के कपड़े पहने जाते हैं| इस दिन को “श्री पंचमी” के रूप में भी जाना जाता है। आइये जानते हैं कि वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है |
Feb 1, 2017 15:12 IST
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वसंत पंचमी एक लोकप्रिय हिन्दू त्योहार है जिसे वसंत की शुरूआत के रूप में मनाया जाता है| पंजाब क्षेत्र में, इसे वसंत के पांचवें दिन पतंग को उड़ाकर मनाते हैं| इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है, अतः सभी पढने वाले विद्यार्थी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है| इस दिन को श्री पंचमी के रूप में भी जाना जाता है।

यहाँ तक कि भगवत गीता मे श्री कृष्ण भगवान ने कहा है कि "वसंत मेरें रूपों में से एक है"

Basant Panchmi

Source: www.punjabigraphics.com

इस दिन पीले रंग के कपड़े पहने जाते हैं और तरह-तरह के खाद्य पदार्थों को पकाया जाता है जैसे- बूंदी के लड्डू, पीले रंग के मीठे चावल आदि| आइए जानते हैं कि वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है|

वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है

Why basant panchmi celebrated

Source: www.hindi.webdunia.com

'वसंत' शब्द का अर्थ है वसंत और 'पंचमी' का पांचवें दिन, इसलिये माघ महीने में जब वसंत ऋतु का आगमन होता है तो इस महीने के 5वे दिन यानी पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है, इस दिन स्कूल और कॉलेजों में माँ सरस्वती का पूजन होता है और सभी विद्यार्थी विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा करते हैं|

हम सभी जानतें है कि हमारे देश भारत में 6 ऋतुएँ होती है जिनके नाम क्रमशः वसंत ऋतु , ग्रीष्म ऋतु , वर्षा ऋतु , शरद ऋतु , हेमन्त ऋतु और शिशिर ऋतु अर्थात पतझड़ हैं| जिनमें से वसंत ऋतु का मौसम सबसे ज्यादा सुहावना होता है और इसीलिए वसंत ऋतु को ऋतुओ का राजा यानी ऋतुराज भी कहा जाता है क्योंकि इस मौसम में हर जगह धरती पर हरियाली होती है, इसी मौसम में गेहूं और सरसों की खेती की जाती है और ऐसा लगता है कि गेहू के खेतों ने हरे रंग की साड़ी पहनी हो और दूसरी तरफ पीले सरसों के खेत सोने जैसे लगते है मानो हर जगह सोना बिखेर दिया गया हो|

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आइए वसंत पंचमी के बारे में और कुछ अदभुत तथ्यों पर नज़र डालते हैं

Birth of Goddess Saraswati

Source: www.exoticindiaart.com

वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का जन्मदिवस भी कहा जाता है, इसलिये इसे  माँ सरस्वती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाते है | इसके पीछे एक छोटी सी कहानी है- “हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी तब हर तरफ शांति व्याप्त थी कही कोई ध्वनि नहीं सुनाई पड़ रही थी| उस समय भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से जल लेकर धरती पर छिड़का जिससे एक अदभुत शक्ति एवं चतुर्भुज हाथों वाली नारी का अवतार हुआ, जिनके हाथों में वीणा, माला, पुस्तक आदि थी और जब उन्होंने ब्रह्माजी के कहने पर वीणा बजाई तो हर तरफ संसार मे ध्वनि फैल गई, तब ब्रह्माजी ने वीणा की देवी को सरस्वती के नाम से पुकारा जोकि ज्ञान और संगीत की भी देवी कहलाती है| इसी कारण इस दिन को माँ सरस्वती की उत्पत्ति के रूप मे मनाया जाता है|

on basant panchmi children taught to write

Source: s-media-cache-ak0.pinimg.com

इस दिन को बच्चे के जीवन में एक नई शुरुआत के रूप में भी मनाते है| परंपरागत रूप से बच्चों को इस दिन पहला शब्द लिखना सिखाया जाता है | क्योंकि इस दिन को ज्ञान की देवी की पूजा के साथ एक नई शुररूआत मानी जाती है |

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- पीले रंग का इस दिन काफी महत्व होता है| वसंत का रंग होने के कारण  पीले रंग को 'बसंती' रंग भी कहा जाता है| यह रंग समृद्धि, प्रकाश, ऊर्जा और आशीर्वाद का प्रतीक है। इस कारण लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और पीले रंग में पारंपरिक व्यंजनों को बनातें है|

- लोककथाओं के अनुसार, धन और समृद्धि को लाने के लिए वसंत पंचमी पर सांप को दूध पिलाया जाता है|

basant panchmi kite flying

Source: www.bloggingways.net.com

- पतंग उड़ाना जोकि भारत मे एक लोकप्रिय खेल है, वसंत पंचमी के त्योहार के साथ जुड़ा हुआ है। खास तौर पर पंजाब में पतंग उड़ाने की परंपरा का काफी महत्व है |

- वसंत पंचमी के दिन ही होलिका की मूर्ति के साथ लकड़ीयों को इकट्ठा करके एक सार्वजनिक स्थान पर रख दिया जाता है| अगले 40 दिनों के बाद, होली से एक दिन पहले, श्रद्धालु होलिका दहन करते हैं जिसमें छोटी छोटी टहनियाँ और अन्य ज्वलनशील सामग्री भी डालते है|

Basant panchmi pooja

Source: www.static.drikpanchang.com

- हमारे भारत मे कोई भी त्योहार मीठे के बिना अधूरा होता है– आइए  देखते हैं अलग-अलग जगहों पर क्या-क्या मीठे पकवान बनाएं जाते हैं|

बंगाल – माँ सरस्वती को बूंदी के लड्डू और मीठे चावल अर्पित किये  जाते हैं|

बिहार – माल पुआ, खीर और बूंदी माँ सरस्वती को अर्पित करते हैं|

उत्तर प्रदेश – यहाँ भगवान कृष्ण को केसरिया चावल अर्पित करते हैं|

पंजाब – यहाँ मीठे चावल, मक्के की रोटी, सरसों का साग खाया जाता है|

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