1. Home
  2. Hindi
  3. मिलिए एक ऐसे IAS ऑफिसर से जिसने अपनी मेहनत से संवारी हजारों सरकारी स्कूल के बच्चों की जिन्दगी

मिलिए एक ऐसे IAS ऑफिसर से जिसने अपनी मेहनत से संवारी हजारों सरकारी स्कूल के बच्चों की जिन्दगी

सांगली में नियुक्त आईएएस ऑफिसर जितेन्द्र डोडी ने अपने प्रयास से केवल 6 माह में ही जिले के लाखों बच्चों की शिक्षा के स्तर में सुधार ला दिया है. आइये जानें पूरी स्टोरी  

IAS Jitendra Dodi education initiative
IAS Jitendra Dodi education initiative

कहते हैं जब आप कोई काम बहुत लगन से करते हैं तो आपको उसमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. एक ऐसा ही प्रयास महाराष्ट्र के सांगली जिले में नियुक्त IAS ऑफिसर जितेन्द्र डोडी ने किया. जितेन्द्र डोडी ने सांगली जिले के छात्रों के लिए लर्निंग इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम यानी एलआईपी शुरू किया. इस प्रोग्राम के माध्यम से ऑफिसर ने अपने जिला परिषद स्कूली छात्रों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने का प्रयास किया. 

वर्ष 2021 में सांगली में तैनात आईएएस ऑफिसर जितेन्द्र डोडी ने जब नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) देखा तो उन्हें हैरानी हुई. उन्होंने देखा महाराष्ट्र के छात्र राष्ट्रीय औसत से बेहतर लेकिन फिर भी वो कम अंक प्राप्त करते हैं. उन्होंने कक्षा-3 के छात्रों  से बातचीत की जिससे उन्हें पता चला कि इन बच्चों में गणित तथा भाषा में बेसिक नॉलेज भी नहीं है. जिसके बाद उन्होंने निर्णय लिया कि, वे जिले में लर्निंग इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम यानी एलआईपी शुरू करेंगे और इसके माध्यम से वे जिले के स्कूलों क छात्रों के लर्निंग को इम्प्रूव करेंगे और उनके रिजल्ट्स में सुधार लायेंगे.

इसके लिए उन्होंने प्रत्येक बच्चे का व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन करने, रिपोर्ट कार्ड बनाने और उन्हें कक्षा के शिक्षकों को वितरित करने से लेकर छात्रों को रचनात्मक रूप से बेसिक लैंग्वेज और संख्यात्मक कौशल सिखाने के लिए रणनीति विकसित करने और शिक्षकों को रचनात्मक होने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाने तक कई प्रयास किये.

एलआईपी प्रोग्राम ने अब तक 1 लाख से अधिक बच्चों, 5,500 से अधिक शिक्षकों, 90 ब्लॉक-स्तरीय और जिला-स्तरीय संवर्गों तक पहुँच कर छह महीने से ज्यादा समय पूरा कर लिया है. इसके बाद आईएएस ऑफिसर डोडी ने प्रथम फाउंडेशन के साथ मिल कर प्रत्येक छात्र का बेसिक मूल्यांकन करवाया. और आज देश में सांगली ऐसा पहला जिला है जहाँ प्रत्येक छात्र का व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन किया जा रहा है.

इस प्रोग्राम के लिए सबसे पहले 250 टीचर्स का चुनाव किया गया जिन्होंने खुद से तैयार किये गए पढाई से सम्बन्धित मैटेरिअल को स्टूडेंट्स के बीच वितरित किया साथ ही बड़े बच्चों के लिए समर में अलग से कक्षाएं चलाई गईं. बच्चों को डेली यूज़ होने वाली वस्तुओं के माध्यम से प्रैक्टिकल ज्ञान देने की कोशिश की गई साथ ही बच्चों की शिक्षा में रूचि बढ़ाने के लिए एक रेडिओ प्रोग्राम भी शुरू किया गया. 

इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरुप 6 माह बाद बच्चों का पुन: मूल्यांकन किया गया और पाया गया कि क्लास 3 से 5 तक में  पढ़ने वाले बच्चे अब किताबों को पढ़ सकते हैं, इनका प्रतिशत अब 79 हो गया, और इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि  कक्षा 3 के बच्चों की संख्या में 17% प्रतिशत की वृद्धि हुई, अब सामान्य मैथ्स के प्रश्नों को हल कर सकते हैं. और वहीं ग्रेड 4 और 5 में कम से कम 10 प्रतिशत अंकों का सुधार हुआ है.