1. Home
  2. Hindi
  3. Incredible india: जानें प्राचीन भारत के 10 महान वैज्ञानिकों के विषय में जिन्होंने विश्व के प्रथम अविष्कार किये

Incredible india: जानें प्राचीन भारत के 10 महान वैज्ञानिकों के विषय में जिन्होंने विश्व के प्रथम अविष्कार किये

प्राचीन काल से ही भारत विश्व गुरु रहा है और भारत ने विश्व को कई ऐसे महान दार्शनिक और वैज्ञानिक दिए हैं जिन्होंने विश्व को अभूतपूर्व खोजें और आविष्कार दिए हैं. आइये जानें ऐसे ही कुछ प्राचीन महान भारतीय वैज्ञानिकों और उनकी खोजों के बारे में

Ancient Indian Scientist
Ancient Indian Scientist

Incredible india: भारत प्राचीन काल से ही विश्व गुरु रहा है और भारत के प्राचीन वैज्ञानिकों ने विश्व को कई अभूतपूर्व और बहुमूल्य खोजें विश्व को दी हैं. ये अविष्कार गणित से लेकर, मेडिकल, टेक्नोलॉजी और साइंस के साथ ही भूगोल तक से सम्बन्धित रहे हैं. भारत के प्रसिद्ध आविष्कारकों में चरक, बाणभट्ट, आर्यभट्ट और शुश्रुत, कणाद आदि प्रमुख रहें हैं. आज हम आपके लिए ऐसे ही कुछ वैज्ञानिकों और उनके आविष्कारों के बारे में जानकारी ले कर आयें हैं.

आर्यभट्ट 
आर्य भट्ट के नाम से भला ऐसा कौन सा भारतीय होगा जो परिचित नहीं होगा. आर्यभट्ट वो महान गणितज्ञ हैं जिन्होंने इस दुनिया को शून्य से परिचित करवाया था. और इस शून्य के बिना गणित को समझना असम्भव है. गणितज्ञ आर्यभट्ट ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने शून्य को एक संकेत '0' के रूप में पहचान दी. साथ ही आर्यभट्ट ने एक बिलकुल नवीन पद्धति का आविष्कार किया। उन्होंने अक्षरों और मात्राओं के प्रयोग से संख्या बताने की विधि निकाली, जैसे अ का अर्थ एक, ई का अर्थ सौ, च का अर्थ छह, छ का अर्थ सात इत्यादि.

कणाद 
क्या आपको पता है परमाणु की खोज भारत में हुई है, जी हाँ भारत ही विश्व का ऐसा पहला देश है जहाँ परमाणु की खोज हुई है, और ये खोज हमारे प्राचीन वैज्ञानिक कणाद ने की है. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने जॉन डाल्टन के जन्म के सदियों पूर्व ही परमाणु की खोज कर ली थी, उन्होंने अणु जैसे छोटे तत्व का भी पता लगा लिया था. कणाद के अनुसार, 2 समान परमाणु मिलकर 'द्विणुक' का निर्माण कर सकते हैं. यह द्विणुक ही आज के रसायनज्ञों का 'वायनरी मालिक्यूल' होता है. 

चरक 
चरक को भारतीय चिकित्सा विज्ञान का पिता कहा जाता है. करीब 200 -300 ई पूर्व चरक ने अधिकांश बीमारियों का इलाज खोज लिया था. अपनी पुस्तक चरक संहिता में इन्होने कई प्राकृतिक बीमारियों का उल्लेख किया है. सोने, चांदी को पिघला कर उसकी भस्म बनाने की शुरूआत भी चरक ने ही की है. 

सुश्रुत 
जब विश्व के लोग ऑपरेशन के बारे में जानते भी नहीं थे तब हमारे प्राचीन भारत के प्रसिद्ध आचार्य सुश्रुत ने प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत कर दी थी. सुश्रुत को प्लास्टिक सर्जरी का जनक माना जाता है, इन्होने आज से करीब 2600 साल पहले ही  प्लास्टिक सर्जरी की थी. प्राचीन भारतीय ग्रंथो के अनुसार, एक बार एक व्यक्ति बहुत बुरी तरह से घायल हो गया और उसकी नाक फट गई थी तब आचार्य सुश्रुत ने उसकी नाक की सर्जरी की थी. इसके लिए सुश्रुत ने उसको थोड़ी शराब पिलाई, जिससे उसे दर्द का एहसास कम हो गया और तब उन्होंने उसके गाल का कुछ मांस काट कर उसकी नाक पर प्राकृतिक लेपों के सहारे बाँध दिया.  

कुछ दिनों बाद उसकी नाक और गाल दोनों ही स्थानों पर पहले जैसा मांस और स्किन आ गई. इसे विश्व की पहली प्लास्टिक सर्जरी माना जाता है. इसके अतिरिक्त आचार्य सुश्रुत बहुत गहरे आतंरिक ऑपरेशन भी करते थे. उनके ग्रन्थ सुश्रुत संहिता में करीब 300 शल्यचिकित्साओं और 150 यंत्रों का भी उल्लेख मिलता है.

वराह मिहिर  
वराह मिहिर प्राचीन भारत के एक महान खगोल शास्त्री थे. वराह मिहिर पहले आचार्य थे जिन्होंने ज्योतिष के ज्ञान, संहिता और होरा के ज्ञान की स्पष्ट रूप से व्याख्या की थी. इन्होने अपनी पुस्तक वृहत्संहिता में नक्षत्र ज्ञान, वनस्पति शास्त्र, भौतिक भूगोल प्राचीन इतिहास, भवन निर्माण और वास्तु कला के बारे में विस्तार से उल्लेख किया है.                                  

ब्रह्मगुप्त 
ब्रह्मगुप्त गणित और ज्योतिष के बहुत बड़े विद्वान् थे. इन्होने ही सर्वप्रथम दशमलव की खोज की थी साथ ही इन्होने शून्य के प्रयोग का भी उल्लेख किया. इनके द्वारा रचित ब्रह्मस्फुट सिद्धांत' सबसे पहला ग्रन्थ माना जाता है जिसमें शून्य का उल्लेख  अंक के रूप में किया गया है. साथ ही इस ग्रन्थ में ऋणात्मक अंकों और शून्य के गणित में प्रयोग के नियमों का किया गया है।  

बौधायन 
बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ, शुल्ब सूत्र और श्रौतसूत्र के रचयिता थे, इन्होने रेखागणितज्ञ और ज्यामिति का उल्लेख भी किया है. इनके सूत्र वैदिक संस्कृत में हैं जो धर्म, दैनिक कर्मकाण्ड, गणित आदि से सम्बन्धित हैं. इनके ग्रन्थ कृष्ण यजुर्वेद के तैत्तिरीय शाखा से सम्बन्धित हैं. सूत्र ग्रन्थों में सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ हैं. इनकी रचना 7वीं-8वीं शताब्दी ईसापूर्व हुई थी.
 
ऋषि कण्व
वायु विज्ञान की रचना ऋषि कण्व द्वारा की गई है और इसका सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है. ऋषि कण्व ऋषि अंगिरस के वंशज थे. वायु विज्ञान ऋषि कण्व द्वारा ऋग्वेद के खंड 8/41/6 में भगवान के जगती मीटर में समझाया गया है और ऋषि कश्यप ने ऋग्वेद के खंड 9/64/26 में इस पदार्थ के गुणों का वर्णन किया है.  

भास्कराचार्य 
अभी तक आपने सुना होगा कि, गुरुत्वाकर्षण की खोज न्यूटन ने की है लेकिन क्या आप जानते हैं कि न्यूटन से भी कई सौ वर्षों पूर्व ही गुरुत्वाकर्षण की खोज भारत में हो चुकी थी और इसका प्रमाण 400-500 ई में रचित ग्रंथ सिद्धांतशिरोमणि में मिलता है. इस ग्रन्थ के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण की खोज भास्कराचार्य ने की थी. इस सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है और इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरते हैं. और इस सिद्धांत के लगभग 1200 साल बाद न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण नियम की खोज की. 

महर्षि विश्वामित्र 
महर्षि विश्वामित्र जन्म से क्षत्रिय थे. कामधेनु गाय पाने की लालसा में इन्होने ऋषि वशिष्ठ के साथ युद्ध किया इस युद्ध में उन्हें हार का सामना किया जिसके बाद विश्वामित्र तपस्वी हो गए थे. अपने तप और ज्ञान के कारण उन्हें महर्षि की उपाधि मिली और साथ ही चारों वेदों और ओमकार का ज्ञान प्राप्त हुआ. इन्होंने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई. विश्वामित्र ने ही प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले खोजी थी. यह पहले ऐसे ऋषि थे जिन्होंने गायत्री मन्त्र को समझा. ऐसा कहा जाता है कि केवल 24 गुरु हैं जो गायत्री मन्त्र को जानते हैं और उनमें प्रथम स्थान महर्षि विश्वामित्र का है.