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Vikram-S: भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट 'विक्रम-एस' हुआ लांच, जानें इसके बारें में

India’s first private rocket: भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट- विक्रम-एस (Vikram-S) को आज श्री हरिकोटा से लांच कर दिया गया है. जिसे हैदराबाद में स्थित भारत के एक स्पेस स्टार्टअप ने तैयार किया है. जानें इसके बारें में

रॉकेट विक्रम-एस हुआ लांच
रॉकेट विक्रम-एस हुआ लांच

India’s first private rocket: भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट- विक्रम-एस (Vikram-S) को आज श्री हरिकोटा से लांच कर दिया गया है. स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने यह रॉकेट विकसित किया है जो हैदराबाद में स्थित भारत का एक स्पेस स्टार्टअप है.  

स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला मिशन:

यह स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला मिशन है जिसको स्काईरूट ने 'प्रारंभ' (Prarambh) नाम दिया है. यह तीन पेलोड को लेकर स्पेस में जा रहा है. इसे इसरो के श्रीहरिकोटा लॉन्चपैड से लॉन्च किया गया. स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ पवन कुमार चंदना ने बताया था कि इसकी लॉन्चिंग विंडो 12 नवंबर से 16 नवंबर थी लेकिन ख़राब मौसम के कारण लॉन्चिंग में देरी हुई जिसे अब लांच कर दिया गया है.

स्काईरूट के विक्रम सीरीज के रॉकेट:

स्काईरूट ने अपने रॉकेट सीरीज को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर 'विक्रम' रखा है. यह विशेष रूप से स्माल सैटेलाइट के लिए तैयार किए गए मॉड्यूलर स्पेस लॉन्च रॉकेट की एक श्रृंखला है. रॉकेट- विक्रम-एस सिंगल-स्टेज सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है.

इस रॉकेट सिस्टम का उपयोग आने वाले दशक में 20,000 से अधिक छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए किया जायेगा. विक्रम श्रृंखला को सामर्थ्य के माध्यम डिज़ाइन किया गया है. इसको तीन कैटेगरी में डिवाइड किया गया है जो इस प्रकार है विक्रम-I, विक्रम-II और विक्रम-III.

भारत में स्पेस सेक्टर की एक नयी शुरुआत:

स्काईरूट एयरोस्पेस की इस पहल से भारत में एक नए युग की शुरुआत हुई है. एक स्टार्टअप के रूप में शुरुआत करने वाला स्काईरूट आज भारत की धरती से इसरो से अलग पूर्ण रूप से प्राइवेट रॉकेट की लॉन्चिंग की है. इस पहल से भारत में निजी कंपनियां भी इस तरह के पहल से प्रेरणा लेंगी जो भारत के स्पेस मिशन को और ऊंचाईयों पर ले जायेगा.

भारत में राकेट लांचिंग कॉस्ट कम हो सकता है:

स्काईरूट एयरोस्पेस के इस पहल से आगे आने वाले समय में भारत में राकेट लांच की कॉस्ट 30-40 फिसदी तक कम हो सकती है. स्काईरूट अपने राकेट में 3D क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग कर रहा है जिसमें खास तरह का फ्यूल उपयोग किया जा रहा है. यह फ्यूल ना सिर्फ सस्ता है बल्कि यह एनवायरनमेंट को भी कम हानि पहुंचाएगा. अगर यह लॉन्चिंग सफल हुई तो यह भारत के स्पेस फील्ड के लिए नए द्वार खोलेगा.

स्काईरूट एयरोस्पेस के बारें में:

स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की एक प्राइवेट स्पेस कंपनी है. इसकी स्थापना 12 जून 2018 को  की गयी थी. इसके फाउंडर पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका है. इसका मुख्यालय  हैदराबाद में स्थित है. इसका उद्देश्य स्पेस टेक्नोलॉजी को अधिक किफायती, विश्वसनीय और सभी के लिए नियमित बनाने का है. साथ ही भारत में स्पेस की दुनिया को आगे बढ़ाना है.     

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