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मिले अंडरकवर पुलिस कांस्टेबल शालिनी चौहान से जिन्होंने एक रैगिंग केस को सुलझाने में की मदद

Undercover Shalini Chouhan: मध्य प्रदेश पोलिस की 24 वर्षीय कांस्टेबल शालिनी चौहान (Shalini Chouhan) जो इस समय काफी चर्चा में है. उन्होंने एमपी में एक मेडिकल कॉलेज में एक रैगिंग केस में संदिग्धों को पकड़ने में मदद की. जानें उन्होंने कैसे इस मिशन को पूरा किया?    

मिले अंडरकवर पुलिस कांस्टेबल शालिनी चौहान से
मिले अंडरकवर पुलिस कांस्टेबल शालिनी चौहान से

Undercover Shalini Chouhan: मध्य प्रदेश पोलिस की 24 वर्षीय कांस्टेबल शालिनी चौहान (Shalini Chouhan) जो इस समय काफी चर्चा में है. उन्होंने एक मेडिकल कॉलेज में एक रैगिंग केस (ragging Case) में संदिग्धों को पकड़ने के लिए एक स्टूडेंट के रूप में अंडरकवर पुलिस अधिकारी बन कर गयी थी.

कांस्टेबल शालिनी चौहान की यह कहानी किसी लेडी सिंघम से कम नहीं है. शालिनी चौहान उस कॉलेज में एक नर्स की भूमिका में गयी थी. 

यह घटना इंदौर के महात्मा गाँधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (Mahatma Gandhi Memorial Medical) की है. जहाँ शालिनी ने बड़ी ही सतर्कता से स्टूडेंट के बीच में रहकर इस केस के संदिग्धों को पकड़ने में अहम् रोल निभाया. जिस कारण वह आज चर्चा का विषय बनी हुई है.

कौन है शालिनी चौहान?

शालिनी चौहान मध्य प्रदेश पुलिस में हाल ही में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त हुई है. शालिनी कॉमर्स से स्नातक है. उनके पिता भी पुलिस में थे जो 2010 में रिटायर हुए थे. शालिनी ने इस साल जुलाई में MBBS प्रथम वर्ष के छात्रों के एक ग्रुप की रैगिंग के केस में MGM कॉलेज के 11 सीनियर्स की पहचान करने में मदद की है. जिसके बाद एमपी का पूरा पुलिस प्रशासन उनके इस बहादुरी के काम का मुरीद हो गया है.

शालिनी ने कैसे की इस केस में मदद?

शालिनी ने एक इंटरव्यू में बताया की इस केस को हल करने के लिए सीनियर पुलिस ऑफिसर्स के निर्देश पर अंडरकवर टीम का गठन किया गया था. इस केस को थाना प्रभारी तहजीब काजी और SI सत्यजीत चौहान लीड कर रहे थे.

शालिनी को कुछ स्टूडेंट्स की जानकारी दी गयी थी, जिसके बाद वह अंडरकवर बन कर स्टूडेंट्स के बीच रहकर रैगिंग के केस में शामिल स्टूडेंट्स की पहचान करनी थी.

उन्होंने बताया की वह इसके लिए काफी समय कॉलेज की कैंटीन में बिताती थी इस दौरान वह फ्रेशर स्टूडेंट्स से काफी बात करती थी जिससे उनसे घुला मिला जाये.

साथ ही शालिनी इतनी सवाधानी से कम कर रही थी किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगी की वह एक मिशन पर है. इस दौरान वह कॉलेज में कई फ्रेंड बना लिए थे. लगभग पांच महीने बाद उन्हें कामयाबी मिली और वह उन संदिग्ध सीनियर्स स्टूडेंट्स की पहचान करने में सफल रही.

क्या था मामला?

यह घटना इंदौर के महात्मा गाँधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की है जहाँ फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स की रैगिंग से सम्बंधित है. इस मामले में कॉलेज के 11 सीनियर्स संदिग्ध थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इनमें से एक स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) की हेल्पलाइन पर रैगिंग की शिकायत की थी.

जिसके बाद कॉलेज मैनेजमेंट ने कॉलेज के अज्ञात सीनियर्स के खिलाफ पिछले 24 जुलाई को नजदीकी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया था.