राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शिक्षा जगत में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सरकारी और निजी स्कूलों की सुबह की असेंबली में अखबार पढ़ना जरूरी कर दिया है। शिक्षा विभाग के इस नए आदेश का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रटंत विद्या से दूर ले जाकर उन्हें दुनिया भर के करंट अफेयर्स से जोड़ना है। यह नियम प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के सभी विद्यालयों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा।
निर्देशों के अनुसार, छात्रों को स्कूल सभा में प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट तक अखबार पढ़ना अनिवार्य है। इससे न केवल उन्हें राष्ट्रीय और विश्वव्यापी घटनाओं से अवगत रहने में मदद मिलेगी, बल्कि वे प्रारंभिक अवस्था में ही समाचारों को समझने और उनका विश्लेषण करने में भी सक्षम होंगे।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
स्कूल असेंबली में अखबार पढ़ने के पीछे सरकार के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं:
- सामान्य ज्ञान में वृद्धि: छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि देश-दुनिया की राजनीति, विज्ञान और खेल जगत की खबरों से भी वाकिफ हों।
- रीडिंग स्किल्स में सुधार: नियमित रूप से जोर-जोर से अखबार पढ़ने से छात्रों के उच्चारण और भाषाई कौशल में सुधार होगा।
- तार्किक क्षमता का विकास: समाचारों के विश्लेषण से छात्रों में मुद्दों को समझने और उन पर अपनी राय बनाने की क्षमता विकसित होगी।
- प्रतियोगी एग्जाम की तैयारी: भविष्य में होने वाली UPSC, SSC या राज्य स्तर की एग्जाम के लिए छात्रों की नींव अभी से मजबूत होगी।
नई व्यवस्था का स्वरूप
स्कूलों को इस नियम का पालन कैसे करना है, इसके लिए विभाग ने स्पष्ट रूपरेखा तैयार की है:
| डिटेल्स | निर्देश |
| समय सीमा | प्रार्थना सभा के दौरान कम से कम 10-15 मिनट |
| चयनित छात्र | प्रतिदिन अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों को समाचार पढ़ने का मौका मिलेगा |
| समाचारों के प्रकार | राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य स्तर की खबरें, खेल और प्रेरक विचार |
| टीचर्स की भूमिका | टीचर्स कठिन शब्दों के अर्थ समझाएंगे और महत्वपूर्ण खबरों पर चर्चा करेंगे। |
स्कूल असेंबली का नया 'मॉडल'
अब राजस्थान के स्कूलों की सुबह की सभा कुछ इस तरह दिखाई देगी:
- खबरों का चुनाव
छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल सकारात्मक और सूचनात्मक खबरें ही चुनें। अपराध या नकारात्मक खबरों के बजाय विकास, खोज और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- शब्द-ज्ञान (Vocabulary Building)
अखबार पढ़ने के बाद, छात्र उस दिन के किसी एक 'कठिन शब्द' को बोर्ड पर लिखेंगे और उसका अर्थ पूरी सभा को बताएंगे।
- प्रश्न-उत्तर सत्र
समाचार वाचन के अंत में, शिक्षक पढ़ी गई खबरों से संबंधित 2-3 सवाल पूछेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्र ध्यान से सुन रहे हैं।
शिक्षाविदों और पेरेंट्स की प्रतिक्रिया
इस फैसले का प्रदेश भर में स्वागत किया जा रहा है। शिक्षाविदों का मानना है कि डिजिटल युग में, जहां बच्चे सोशल मीडिया पर अधिक समय बिता रहे हैं, अखबार उन्हें प्रामाणिक जानकारी के करीब लाएगा।
शिक्षा विभाग का संदेश: "अखबार केवल सूचना का माध्यम नहीं है, बल्कि यह छात्र के व्यक्तित्व निर्माण और उसे एक जागरूक नागरिक बनाने का एक सशक्त औजार है।"
इस पहल के मुख्य लाभ
- झिझक दूर होना: मंच पर खड़े होकर अखबार पढ़ने से बच्चों का स्टेज फियर खत्म होगा।
- करेंट अफेयर्स: छात्रों को अलग से कोचिंग या मैगजीन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- स्थानीय जोड़ा: छात्र अपने जिले और राज्य की समस्याओं और विकास कार्यों को बेहतर समझ सकेंगे।
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