मां को खोया, बैंक बैलेंस शून्य हुआ... फिर भी नहीं मानी हार, ऐसे लिखी IPS विक्रम दहिया ने सफलता की कहानी
कहते हैं कि कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना भी पड़ता है। यही कहानी विक्रम दहिया की भी है, जिन्होंने अपने IPS बनने के सपने को पूरा करने के लिए लंदन की नौकरी तक छोड़ दी और जीवन में वह दिन भी देखें, जब उनका बैंक बैलेंस पूरी तरह समाप्त हो चुका था और मां भी दुनिया से चल बसी थी, लेकिन विक्रम ने हिम्मत नहीं हार और आज जिसका रिजल्ट हम सभी के सामने हैं।
मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। आज अगर हम यह लाइन विक्रम दहिया के लिए कहे, तो गलत नहीं होगा, जिनकी IPS बनने की कहानी काफी संघर्ष भरी रही है। IPS बनने के लिए विक्रम ने पहले लंदन में एक फर्म में करियर शुरू किया और बाद में नौकरी छोड़ दी। दिल्ली के राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर की गलियों में उन्होंने संघर्षपूर्ण जीवन जिया। सेविंग्स पूरी खत्म हो चुकी थी और बैंक बैलेंस जीरो होने पर आर्थिक तंगी ने उन्हें घेर लिया था। जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। 01 अक्टूबर 2018 को उनकी मां का निधन हो गया था और इससे उन्हें गहरा सदमा पहुंचा। इन सबके बावजूद विक्रम ने हिम्मत नहीं हारी।
आखिरकार वह दिन भी आया, जब विक्रम ने साल 2020 में अपने 5वें प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और IPS अधिकारी बनकर न केवल अपने मां के सपने को साकार किया, बल्कि देश और दुनिया के लिए मिसाल कायम की। आज हम आपको विक्रम दहिया की सफलता की कहानी के बारे में बताएंगे।
विक्रम IIM से हैं ग्रेजुएट
विक्रम दहिया बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी स्कूल शिक्षा पास ही के स्कूल से पूरी की और आगे की पढ़ाई विक्रम ने IIM से पूरी की। उन्होंने IIM से MBA किया और लंदन में एक फर्म में करियर शुरू किया था पर वहां उनका मन नहीं लगा। समाज में बदलाव लाने की सोच के चलते UPSC सिविल सेवा की तैयारी शुरु कर दी और आज जिसका रिजल्ट हम सभी के सामने हैं।
जब सेविंग्स होने लगी थी खत्म…….
विक्रम का IPS बनने का सफर इतना आसान नहीं रहा। जब उन्होंने लंदन में नौकरी छोड़ दिल्ली के राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर की गलियों में तैयारी करना शुरू किया, तो उनकी सेविंग्स धीरे-धीरे खत्म हो रही थी। थोड़े पैसे कमाने के लिए प्राइवेट नौकरी के लिए एप्लाई किया, लेकिन रिजेक्शन ही मिला। लोगों ने भी तंज कसने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। आत्मविश्वास भी पूरी तरह से टूटने लगा था।
विक्रम पर टूटा दुखों का पहाड़
विक्रम के सिर के ऊपर दुखों का पहाड़ और ज्यादा टूटा, जब 1 अक्टूबर 2018 को उनकी मां का देहांत हो गया था। मां के दुनिया से चले जाने के बाद विक्रम डिप्रेशन में भी चले गए थे। इतना सब कुछ होने के बाद विक्रम ने अपने अंदर एक छोटी सी उम्मीद बचाए रखी और सिविल सेवा की तैयारी करते रहें। आखिरकार साल 2020 का वह दिन भी आया, जब विक्रम ने अपने 5वें प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और IPS अधिकारी बन गए और यह साबित कर दिया कि कुछ भी नामुमकिन नहीं।
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Farhan Khan is an education journalist with over 3 years of experience specializing in the public sector recruitment space. From UPSC and SSC to Banking and Defense, he provides end-to-end coverage on exam notifications, admit cards, and Sarkari results. Farhan holds a Master’s degree in Mass Communication from Guru Jambheshwar University and blends research-driven journalism with creative storytelling to guide aspirants through their exam preparation journeys.