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UP Board Class 10 Science Notes :Human Genetics Part-I

Nov 28, 2017 17:40 IST
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UP Board Class 10 Science Notes
UP Board Class 10 Science Notes

In this article we are providing UP Board class 10th Science notes on chapter 24 (Human Genetics)1st part. We understand the need and importance of revision notes for students. Hence Jagran josh is come up with the all-inclusive revision notes which have been prepared by our expert faculty.

Some of the benefits of these exclusive revision notes include:

1. Cover almost all important facts and formulae.

2. Easy to memorize.

3. The solutions are elaborate and easy to understand.

4. These notes can aid in your last minute preparation.

The main topic cover in this article is given below :

डी०एन०ए० (DNA) :

डी०एन०ए० की खोज सर्वप्रथम फ्रीड्रिक मीस्चर (Friedrick Meischer) ने की। यह केन्द्रक में पाया जाता है। इसका निर्माण डीआँक्सी राइबोस शर्करा, फॉस्फेट तथा नाइट्रोजनी बेस (एडिनिन, ग्वानीन साइटोसीन तथा थायमीन) से होता है। इसमें यूरेसिल का अभाव होता हैं।

DNA को आण्विक संरचना (Molecular structure of DNA) - जे० डी० वाटसनं (J. D. Watson ) और एच० एफ० कसी० क्रिक (H.F.C. Circk) ने सन 1953 ईं० में DNA की रचना के बारे में एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसे उनके नाम पर वाटसन और क्रिक का मॉडल कहते है। इसके लिए वाटसन (Watson) एवं क्रिक (Crick) तथा विलकीन्स (Wilkins) को सम्मिलित रूप से सन् 1962 ई० में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

उनके अनुसार|

Science notes for class 10th

(1) DNA द्विचक्राकार रचना  (Double helical structure) है, जिसमें पॉलिन्यूक्लिओटाइड की दोनों श्रृंखलाएँ एक अक्ष रेखा पर एक - दूसरे के विपरीत दिशा में कृण्डलित अथवा रस्सी की तरह ऐंठी हुई रहती हैं।

(2) दोनो श्रृंखलाओं का निर्माण फॉस्फेट (P) एवं शर्करा (S) के अनेक अणुओं के मिलने से होता है। नाइट्रोजनी बेस शर्करा के अणुओं से पार्श्व में लगे होते हैं।

(3) पॉलिन्यूविलओटाहड श्रृंखलाओं के बेस लम्बी अक्ष रेखा के सीधे कोणीय तल में लगें रहते है तथा सीढी के डण्डे के आकार की रचना बनाते है।

(4) नाइट्रोजनी क्षारक एक विशिष्ट क्रम में जुडे रहते है, एडिंनीन (A तथा थायमीन (T) के मध्य दो हाइड्रोजन बन्ध (A = T) होते है, जबकि साइटोसीन (C) तथा ग्वानीन (G) के मध्य तीन हाइड्रोजन बन्ध  होते हैं।

(5) DNA के दोहरे हेलिक्स का व्यास  होता है। हेलिक्स के प्रत्येक कुण्डल (turn) में 10 नाइट्रोजन क्षारक जोडे होते हैं। प्रत्येक नाइट्रोजन क्षारक के मध्य की दूरी  होती है और हेलिक्स के प्रत्येक कुण्डल की लम्बाई  होती है।

(6) DNA अणु में एडिनीन की कुल मात्रा थायमीन के बराबर और ग्वानीन की मात्रा साइटोसीन के बराबर होती है। चारगाफ़ का तुल्यता का नियम कहते हैं।

गुणसूत्र (Chromosomes) :

केन्द्रकद्रव्य में स्थित क्रोमैटिन जाल (Chromatin reticulum) कोशिका विभाजन के समय धागे सदृश रचनाओं में पृथकृ हो जाता है। इन्हें गुणसूत्र (chromosomes) कहते हैं। ई. स्ट्रासबर्गर (E. Strasburger, 1875)  ने इन संरचनाओं को सबसे पहले देखा था। डब्ल्यू० वाल्डेयर (W. Waldeyer, 1888) ने इन्हें क्रोमोसोम (chromosomes) नाम दिया। सटन तथा बोवेरी (Sutton and Boveri, 1902) ने क्रोमोसोम परिकल्पना (chromosomal hypothesis) प्रस्तुत की। इसके अनुसार गुणसूत्र आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढी से दूसरी पीढी में पहुंचाने वाली संरचना होती है। प्रत्येक जाति के जीवों में गुणसूत्रो की संख्या एवं संरचना निश्चित होती है। सामान्यतया गुणसूत्र  लम्बे एवं 0.2 से  व्यास के होते हैं।

UP Board Class 10 Science Notes :activities of life or processes of life Part-V

संरचना (Structure) :

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी है देखने पर प्रत्येक गुणसूत्र में निम्नलिखित भाग दिखाई देते हैं-

1. पेलिकिल (pellicle),

2. मैट्रिक्स (matrix),

3. क्रोमोनिमेटा (chromonemata),

4. सेन्ट्रोमियर (centromere),

5. द्वितीयक संकीर्णन (secondary constriction)

6. सैटेलाइट (satellite),

7. टीलोमियर (telomere),

मनुष्य में लिंग निर्धारण (Sex determination in Human) :

मनुष्य की जनन कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 22 जोडे नर तथा मादा दोनों में समान होते है अत: इन्हें आँटोसोम्स (autosomes) कहते हैं। स्त्री में प्राचीन जोड़ा भी समान गुणसूत्रों वाला होता है किन्तु पुरुष में 23वें जोडे के गुणासूत्र असमान होते है, इन्हें हेटरोसोम्स (heterosomes) या एलोसोम्स (allosomes) कहते हैं! 23वें जोडे के गुणसूत्र, लिंग गुणसूत्र (sex chromosomes) भी कहलाते हैं। स्त्री में 23वें जोडे के गुणासूत्रों को XX द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। पुरुष में 23 3वें जोड़े के गुणसूत्र में एक लम्बा, किन्तु दूसरा काफी छोटा होता है और इन्हें XY से प्रदर्शित करते हैं।

युग्मकजनन (gametogenesis) के समय, अर्द्धमूत्री विभाजन द्वारा युग्मकों (gametes) का निर्माण होता है और युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या अगुणित (haploid) रह जाती हैं अर्थात् युग्मक में

sex determination in human

प्रत्येक जोडे का एक ही गुणसूत्र (chromosome) होता हैं। इस प्रकार स्त्री में बने हुए सभी युग्मक (अण्ड) 22+X  गुणासूत्रों वाले किन्तु पुरुष के युग्मक (शुक्राणु) दो प्रकार के 22+X तथा 22+Y गुणसूत्रों वाले बनते हैं। निषेचन के समय नर से प्राप्त शुक्राणु (Y - गुणसूत्र वाला या X - गुणसूत्र वाला) अण्ड से मिलता की इसके फलस्वरूप बने युग्मनज (zygote) में 44 + XX  या 44 + XY गुणसूत्र हो सकते हैं

अर्थात लिंग का निर्धारण निषेचन के समय ही शुक्राणु के गुणसूत्र के आधार पर हो जाता है, क्योकि लिंग गुणसूत्र (sex chromosome) के अनुसार बनने वाले युग्मनज निम्नलिखित प्रकार से नर या मादा शिशु में विकसित होते हैं-

44 + XY नार शिशु (लड़का)

44 + XX मादा शिशु (लड़की)

मनुष्य के अतिरिक्त XY लिंग गुणसूत्र अनेक प्राणियों में पाए जाते हैं| पक्षियों में नर स्मयुग्म्की (ZZ) तथा मादा विषमयुग्मकी (ZW) होते हैं अर्थात इनमें अंड दो प्रकार के बनते हैं| आधे Z गुणसूत्र वाले तथा आधे W गुणसूत्र वाले| सभी शुक्राणु Z गुणसूत्र वाले होते हैं| इनमें लिंग का निर्धारण अंडाणु द्वारा होता है| सभी जीवधारियों में लिंग निर्धारण मेंडेल के नियम के अनुसार होता है|

UP Board Class 10 Science Notes :activities of life or processes of life Part-VI

UP Board Class 10 Science Notes :activities of life or processes of life Part-VII

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