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UP Board Class 12th Chemistry Second Solved Question Paper Set-1: 2011

Feb 10, 2017 13:27 IST

    Get UP Board Class 12 Chemistry-II Solved Question Paper of the year 2011 for the students who are going to appear in 2017 UP Board Class 12th Examinations. The answers of this paper are prepared by experienced Subject Experts of Jagranjosh. The solutions given in these solved papers are as per the latest pattern and the standard marking scheme followed by UP Board. With the help of these solutions, one can easily analyse how much and up to what depth the answers should be given in UP Board Class 12th Chemistry Examination.

    Few questions from the solved papers are here:

    प्रश्न : सम –आयन प्रभाव क्या है? गुणात्मक विश्लेषण में इसके दो उपयोग समझाइए।

    उत्तर:  यदि किसी दुर्बल वैद्दुत – अपघटय के आयनन की मात्रा कम हो आयन वाला एक दूसरा प्रबल वैद्दुत – अपघटय मिलाया जाता है तो दुर्बल वैद्दुत – अपघटय के आयनन की मात्रा कम हो जाती है। इस प्रभाव को सम –आयन प्रभाव कहते हैं।

    1)      NH4Cl की उपस्थिति में NH4OH के आयनन की मात्रा घट जाती है।

    2)      HCl की उपस्थिति में H2S के आयनन की मात्रा घट जाती है।

    प्रश्न : कोलॉइडी विलयन के शोधन की दो विधियों का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: कोलॉइडी विलयन के शोधन की दो विधियों-

    (i) अपोहन-यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि कोलॉइडी विलयन को चर्म –पत्र झिल्ली या इस प्रकार की किसी अन्य झिल्ली में से प्रवाहित करने पर कोलाइडी कण झिल्ली के दूसरी ओर नहीं जा पाते हैं जबकी वास्तविक विलयन के कण दूसरी ओर चले जाते हैं। किसी उपयुक्त झिल्ली में से विसरण की सहायता से कोलॉइडी तथा वास्तविक विलयन के कणों को पृथक करने की क्रिया को अपोहन कहते हैं।

    (ii) अतिसूक्ष्म फिल्टरन- साधारण फिल्टर पत्रों के छिद्रों का आकार लगभग 1 माइक्रोन अर्थात 10-4 से.मी. होता है। कोलाइडी कणों का आकार 10-4 से 10-7 से.मी. की श्रेणी में होता है।

    अशुद्ध कोलॉइडी विलयन में वास्तविक विलयन के कण भी होते है। असे साधारण पत्र में से छानने पर विलायक तथा वास्तविक विलयन के कणों के साथ-साथ कोलाइडी कण भी फिल्टर पेपर के छिद्रों में से बाहर निकल जाते हैं। विशेष विधि द्वारा ऐसे फिल्टर पेपर तैयार किए जाते हैं जिनके फिल्टर पेपर का आकार कम हो। साधरण फिल्टर पेपर को जिलेटिन या कोलाइडन के विलयन में भिगोकर रखने पर ये पदार्थ फिल्टर के छिद्रों में जमा हो जाते हैं तथा ठिद्रों का आकार कम हो जाता है। इसके बाद फिल्टर पेपर को फॉर्मेल्डिहाइड के विलयन में डुबो कर रखते है जिससे वह कङा हो जाता है। इस प्रकार प्राप्त फिल्टर पेपर को अतिसूक्ष्म फिल्टर कहते हैं। अशुद्ध कोलॉइडी विलयन को अतिसूक्ष्म फिल्टर पेपर में से छानने पर उसमें से वास्तविक विलयन के कण तथा विलायक के कम दूर हो जाते हैं तथा कोलाइडी कण अवशेष के रूप में प्राप्त हो जाते हैं। यह विधि अतिसूक्ष्म फिल्टरन कहलाती है।

    प्रश्न : वितरण का नियम लिखिए। इस नियम के दो अनुप्रयोग लिखिए।

    उत्तर: वितरण नियम के अनुसार – “किसी निश्चित ताप पर यदि दो अमिश्रणीय द्रवों में कोई तीसरा पदार्थ, जो दोनों में विलेय हो, घोला जाए तो उस विलेय की दोनों द्रवों में सांद्रता के अनुपात का मान स्थिर रहता है, जो विलेय और विलायक की मात्रा पर निर्भर नहीं करता है। साम्यावस्था पर यदि दो अमिश्रणीय द्रवों में किसी विलेय का सांद्रण C1 तथा C2 है तो वितरण नियम के अनुसार, C1/C2 = K, जहाँ K वितरण स्थिरांक है।

    वितरण का नियम के दो अनुप्रयोग -

    (1)    वितरण सूचक के प्रयोग में।

    (2)    वियोजन अथवा संगुणन की मात्रा ज्ञात करने में।

    प्रश्न : उत्प्रेरण का अधिशोषण सिद्धान्त समझाइए।

    उत्तर: यह सिद्धान्त फैराडे ने सन 1833 में दिया था।मुख्य रूप से ठोस उत्प्रेरकों की क्रिया विधि इस सिद्धान्त की सहायता से स्पष्ट की जाती है। इसके अनुसार अभिकारक पदार्थ उत्प्रेरक के तल पर अधिशोषित हो जाते हैं जिससे अभिकारकों की स्थानीय सांद्रता बढ जाती है। चूँकि अभिक्रिया की गति अभिकारकों की सांद्रता के समानुपाती होती है,इसलिए उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया की गति बढ जाती है। जैसे –जैसे अभिकारक पदार्थ अभिक्रियामें भाग लेते जाते हैं, वैसे- वैसे वे उत्प्रेरक की सतह को छोङते जाते हैं तथा उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारक पदार्थों के अन्य एणु अधिशोषित होते जाते हैं तथा इस प्रकार अभिक्रिया आगे बढती जाती है।

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