केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के फ्रेमवर्क समझौते को 28 दिसम्बर 2016 को पूर्व प्रभाव से मंजूरी दे दी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में विश्व के 121 देश ने 30 नवंबर 2015 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित 21वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में आईएसए का गठन किया था.
वह 121 देश जिन्होंने इस समझौते पर सहमत भी हुए थे. नवंबर 2016 में मोरक्को के मराकेश में हुए 22वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में इस समझौते को हस्ताक्षर के लिए पेश किया गया.
नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पूर्व प्रभाव से इस पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दे दी गयी.
अब तक कुल 25 देश फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. आईएसए का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा स्रोत संपन्न 121 देशों को इस क्षेत्र में सम्मिलित अनुसंधान, किफायती वित्त पोषण और सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए एक मंच पर लाना है.
इसका मुख्यालय हरियाणा के गुड़गांव स्थित ग्वाल पहाड़ी में बनाया जा रहा है. इससे भारत जलवायु और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े मुद्दों के मामले में विश्व में शीर्ष पर जायेगा.
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक देश में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर 100 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इसे हासिल करने के बाद वह विश्व में सर्वाधिक सौर ऊर्जा क्षमता वाला देश बन जायेगा.
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