इस 12 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु महत्त्वाकांक्षा सम्मेलन (क्लाइमेट एंबिशन समिट), 2020 को संबोधित किया और यह कहा कि, भारत न केवल अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ट्रैक पर है बल्कि अपेक्षाओं से अधिक लक्ष्य हासिल कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि, भारत ने वर्ष, 2005 के स्तर से अपनी कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 21% कम कर दिया है.
भारत ने बढ़ाई अपनी नवीकरणीय ऊर्जा और सौर क्षमता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि, भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता दुनिया में चौथी सबसे बड़ी है और यह वर्ष, 2022 में 175 गीगावाट तक पहुंच जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि देश में वर्ष, 2030 तक 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का एक और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है.
सौर क्षमता के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि, भारत की सौर क्षमता वर्ष, 2020 में 2.63 गीगावाट से बढ़कर 36 गीगावाट हो गई है.
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए विश्व मंच पर भारत की दो प्रमुख पहलें
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि, भारत ने अपनी जैव विविधता की रक्षा की है और अपने वन क्षेत्र का विस्तार किया है. दुनिया के मंच पर, इसने दो प्रमुख पहलों का नेतृत्व किया है - ‘कोलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इंटरनेशनल सोलर अलायंस’. उन्होंने यह भी कहा कि, भारत वर्ष, 2047 में एक स्वतंत्र आधुनिक राष्ट्र के रूप में अपनी 100 वीं सालगिरह मनाएगा.
विश्व के लक्ष्य को उच्च स्तर तक ले जाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि हमें इस संबंध में अतीत की स्थिति को भी नहीं भूलना चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने नेताओं से जलवायु आपातकाल की स्थिति घोषित करने का किया आग्रह
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जलवायु महत्वाकांक्षा सम्मेलन 2020 को संबोधित करते हुए सभी सदस्य देशों के नेताओं से कहा कि, जब तक वे कार्बन तटस्थता प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, तब तक उन्हें अपने देश में 'जलवायु आपातकाल की स्थिति' घोषित करनी चाहिए. उन्होंने ऐसे आवश्यक कदमों के बारे में भी बात की जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को बचाने के लिए उठाए जाने चाहिए.
भविष्य की पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को बचाने का आह्वान
इस शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने सदस्य देशों के नेताओं से महत्वाकांक्षा दिखाने और ग्रह को हानि पहुंचाना बंद करने का आग्रह किया. उन्होंने आगे आने वाले बच्चों तथा नाती-पोतों के भविष्य की गारंटी देने के लिए जरूरी काम करने के लिए भी आग्रह किया.
वैश्विक उत्सर्जन कम करने की मांग
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पेरिस समझौते में निर्धारित किये गये कार्बन तटस्थता के लक्ष्य तक पहुंचने में केवल तभी सक्षम हो सकता है, जबकि वैश्विक उत्सर्जन को वर्ष, 2010 के स्तरों की तुलना में वर्ष, 2030 तक 45% कम किया जाए.
पेरिस समझौते के बारे में
यह जलवायु परिवर्तन पर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसे 12 दिसंबर, 2015 को पेरिस में COP21 में 196 दलों द्वारा अपनाया गया था और यह संधि 4 नवंबर 2016 को लागू हुई थी. वैश्विक तापमान को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से अधिक, 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखने के लिए इस पेरिस समझौते को तैयार किया गया था.
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