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विश्व में बढ़ती आर्थिक असमानताओं पर ऑक्सफ़ैम की रिपोर्ट

भारत में  प्रति दिन 2 डॉलर पर अपना जीवन यापन करने वाले लोगों के बीच मृत्यु दर वैश्विक औसत मृत्यु दर से तीन गुना ज्यादा है और गारमेंट सेक्टर में 50% से अधिक कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी पर काम कर रहे हैं.

Jan 23, 2018 18:06 IST
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हाल ही में दुनिया भर में बढ़ती असमानता के संकट से संबंधित "रिपोर्ट वर्क, नॉट वेल्थ" नामक एक रिपोर्ट ऑक्सफैम ने जारी की है. रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के सबसे अमीर 1% लोगों ने 2017 में 82% धन अर्जित किया, जबकि विश्व की लगभग आधी सबसे गरीब आबादी वाले 3.7 अरब लोग अपने धन में कोई बढ़ोत्तरी नहीं कर पाए. इस रिपोर्ट में भारत सहित पूरे विश्व में धन के एकत्र करने के कारणों के विषय में व्यापक चर्चा की गयी है.

इस रिपोर्ट को भारत सहित पांच महाद्वीपों से 10 देशों के लगभग 70,000 से अधिक लोगों का सर्वेक्षण करने के बाद तैयार किया गया है. ये देश विश्व की कुल एक-चौथाई जनसंख्या एवं सकल घरेलू उत्पाद का एक तिहाई से अधिक भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं.

ऑक्सफैम रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नांकित है

• अरबपतियों की संपत्ति में 2010 से 13% की औसत वार्षिक वृद्धि हुई है. यह सामान्य श्रमिकों की मजदूरी से छह गुना अधिक है, जबकि इसमें सालाना औसत वृद्धि सिर्फ 2 प्रतिशत की होती है.

• मार्च 2016 और मार्च 2017 के बीच हर दो दिनों में अरबपतियों की संख्या एक अभूतपूर्व दर से बढ़ी है

• विश्व के शीर्ष पांच वैश्विक फैशन ब्रांडों में से एक का सीईओ सिर्फ चार दिन में उतना कमा लेता है,जितना कि बांग्लादेशी परिधान कार्यकर्ता अपने पूरे जीवनकाल में कमा पाएंगे.

• संयुक्त राज्य अमेरिका में एक  सीईओ, एक वर्किंग डे में इतना कमाता है जितना एक सामन्य वर्कर एक साल में कमाता है.

• पिछले साल इतिहास में अरबपतियों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई,  हर दो दिन पर एक. वर्तमान में  दुनिया भर में 2,043 डॉलर अरबपति हैं और दस में से नौ पुरुष हैं.

• 12 महीनों में संभ्रांत समूह की संपत्ति में 762 अरब डालर की वृद्धि हुई है. यह राशि अत्यधिक गरीबी को खत्म करने के लिए सात गुना अधिक पर्याप्त है.

• एक साल में अरबपतियों ने अपनी सम्पति में 762 अरब डालर की बढ़ोत्तरी की जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान देते हुए महिलाओं ने अवैतनिक देखभाल के तहत प्रतिवर्ष 10 खरब डॉलर जुटाए.

• वैश्विक युवा श्रम शक्ति का लगभग 43% अभी भी या तो बेरोजगार है या फिर गरीबी में रहते हुए काम कर रहा है .

• 500 मिलियन से अधिक युवा लोग प्रति दिन दो अमेरिकी डॉलर से कम पैसों में जीवन यापन करते हैं.

• विकासशील देशों में अनुमानतः 260 मिलियन युवा बेरोजगार,अशिक्षित तथा अप्रशिक्षित हैं

• अस्थायी और अनिश्चित काम विकासशील देशों में एक आदर्श काम है तथा धीरे धीरे इसका प्रचलन विकसित देशों में भी हो रहा है. अस्थायी कर्मचारियों को कम वेतन, कम अधिकार और कम सामाजिक सुरक्षा प्राप्त होते हैं

• ऑक्सफैम की रिपोर्ट ने श्रमिकों के वेतन और शर्तों की कीमत पर शेयरधारकों और कॉरपोरेट बॉस को लाभ पहुंचाने वाले कारकों को रेखांकित किया है. ये कारक श्रमिकों के अधिकारों का हनन, सरकारी नीतियों पर बड़े कारोबार का अत्यधिक प्रभाव और शेयरधारकों के रिटर्न को अधिकतम करने के लिए लागत को कम करने वाले कॉरपोरेट ड्राइव आदि हैं.

• महिला श्रमिक अक्सर अपने आप को सबसे निचले स्तर पर पाती हैं. महिलाएं लगातार पुरुषों की तुलना में कम कमाती हैं. महिलाएं आम तौर पर कम सुरक्षा और कम भुगतान पर काम करती हैं. तुलनात्मक रूप से हर 10 अरबपतियों में से 9 पुरुष अरबपति ही हैं.

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इस समस्या से निबटने के लिए ऑक्सफैम रिपोर्ट ने दुनिया भर की सरकारों से निम्नलिखित उपायों की शुरुआत करने का आग्रह किया है

• शेयरधारकों और शीर्ष अधिकारियों को लिमिटेड रिटर्न देने के साथ साथ  सभी श्रमिकों को कम से कम इतनी मजदूरी मिले कि वे एक गुणवत्ता पूर्ण जीवन जी सकें.

• उदाहरण के लिए  नाइजीरिया जैसे देश में  गुणवत्ता पूर्ण जीवन जीने के लिए वहां की न्यूनतम मजदूरी में तीन गुना वृद्धि करने की जरुरत है.

• लिंग के आधार पर वेतन की असमानता को खत्म करना और महिला श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना.

• परिवर्तन की वर्तमान दरों के आधार पर महिलाओं और पुरुषों के बीच रोजगार के अवसरों और वेतन के अंतर को समाप्त करने में 217 वर्ष लगेगा.

• धनी लोग अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा उच्च दरों पर टैक्स पे करने में लगायें तथा टैक्स से बचने के लिए अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा जरुरत मंद लोगों के स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च करें.

• ऑक्सफ़ैम का अनुमान है कि अरबपतियों की संपत्ति पर 1.5% का वैश्विक कर द्वारा प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने के लिए भुगतान किया जा सकता है.

• ऑक्सफ़ैम की रिपोर्ट ने मानव अर्थव्यवस्था का निर्माण करने का भी सुझाव दिया है.एक मानवीय अर्थव्यवस्था को प्राप्त करने के दो महत्वपूर्ण तरीके हैं - डिजाइनिंग अर्थव्यवस्थाओं को शुरू से ही समान होना चाहिए और अधिक निष्पक्षता के लिए टैक्सेशन और पुनर्वितरण प्रणाली का प्रयोग किया जाना चाहिए.

असमानता को रोकने के लिए क्षेत्रीय सिफारिशें नीचे दी गई हैं

सरकारों के लिए

• असमानता को कम करने के लिए कंक्रीट, समयबद्ध लक्ष्य और कार्य योजना सेट करें

• अधिकतम धन को समाप्त करें

• असमान डेटा को समाप्त करने के लिए मिलकर काम करें

• लिंग भेदभाव के सभी रूपों से निपटने के लिए नीतियां लागू करें

• भाषा और संघ की स्वतंत्रता के लिए नागरिकों और उनके संगठनों के अधिकारों को पहचानें और उन्हें सुरक्षित रखें

• श्रेष्ठ रिटर्न को प्राथमिकता देने वाले व्यापारिक मॉडल को प्रोत्साहित करें

• कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के लिए शेयरधारकों के रिटर्न सीमा और वेतन अनुपात को बढ़ावा देना

• बंधुआ मजदूरी और गरीबी वेतन को ख़त्म करें

• श्रमिकों के संगठन को बढ़ावा देना

• अनिश्चित काम को खत्म करना और श्रमिकों के अधिकारों के सभी नए रूपों का सम्मान करना

• सार्वभौमिक मुक्त सार्वजनिक सेवाओं और एक सार्वभौमिक सामाजिक संरक्षण को हासिल करने के लिए सार्वजनिक प्रतिबद्धता.

• निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा के प्रावधान हेतु सब्सिडी और आवश्यक सेवाओं के लिए सार्वजनिक निधि के प्रयोग पर रोक तथा जरुरी सेवाओं के लिए सार्वजानिक क्षेत्रों का विस्तार.

• अंतरराष्ट्रीय कर सुधारों के लिये एक नई पीढ़ी का आह्वान और टैक्स हेवन के उपयोग को समाप्त करें और पारदर्शिता लाने का प्रयास करें.

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निगमों के लिए

• फायदेमंद शेयरधारकों के लाभांश या बायबैक पर रोक लगाना या जब तक उनके सभी कर्मचारियों को सही मजदूरी नहीं मिल पाती है,अधिकारियों को बोनस का भुगतान करना.

• कंपनियों को बोर्ड में श्रमिक प्रतिनिधित्व और पारिश्रमिक समितियों पर विचार करना चाहिए

• गरीब कर्मचारियों के साथ अपना प्रॉफिट शेयर करें

• सीईओ और मध्यम कर्मचारियों के वेतन का अनुपात कंपनी प्रकाशित करे और इस अनुपात को कम से कम 20: 1 तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध हों.

भारत के संबंध में ऑक्सफैम रिपोर्ट

भारत में  विशेष रूप से उन लोगों में जो सोचते हैं कि वे गरीब हैं और जो वास्तव में राष्ट्रीय आय वितरण सिस्टम के अंतर्गत आते हैं, लगभग 15% से अधिक लोगों का मानना है कि एक व्यक्ति के लिए कड़ी मेहनत के बावजूद भी धन की मात्रा में वृद्धि करना काफी मुश्किल है.

भारत में  प्रति दिन 2 डॉलर पर अपना जीवन यापन करने वाले लोगों के बीच मृत्यु दर वैश्विक औसत मृत्यु दर से तीन गुना ज्यादा है और गारमेंट सेक्टर में 50% से अधिक कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी पर काम कर रहे हैं.
भारत के लिए, लोगों का कहना है कि निजी निगमों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अनुचित रूप में अधिक वेतन दिया जाता है तथा उनके वेतन में 60% की कटौती की जानी चाहिए.

निष्कर्ष

आर्थिक असमानताओं की इस स्थिति को देखते हुए अब दुनिया भर के नीति निर्माताओं को धन संग्रह और बढ़ती आर्थिक असमानता के मुद्दे को हल करने का प्रयास करना चाहिए. यह न केवल बड़े पैमाने पर जनता के हित में है, बल्कि नौकरशाही और राजनीतिक कार्यकारी की वैधता को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है.

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