यह तो सभी जानते होंगे कि साल 2024 एक लीप वर्ष है. जिसका अर्थ है कि 29 फरवरी हर चार साल में एक बार आता है. चूँकि लीप वर्ष आम तौर पर हर चार साल में होता है हालाँकि इसमें कुछ अपवाद भी हैं. पिछले लीप दिन 2020 और 2016 में थे, और अगला लीप वर्ष 2028 में होगा.
यह ऐसा दिन है जो बार-बार नहीं आता है, लोग अलग-अलग तरीकों से इसका जश्न मनाते है. कई लोगों का जन्मदिन भी इस दिन पड़ता है और वह हर चार में अपना जन्मदिवस मनाते है. गूगल भी अपने डूडल के माध्यम से लीप ईयर को सेलिब्रेट कर रहा है.
क्या है लीप डे?
लीप डे वह अतिरिक्त दिन है जो कैलेंडर में जुड़ जाता है. लीप वर्ष हर चार साल में आता है. लीप दिवस 29 फरवरी को पड़ता है, जिससे साल के सबसे छोटे महीने में एक अतिरिक्त दिन जुड़ जाता है. एक लीप ईयर में 366 दिन होते है. अगला लीप वर्ष 2028, 2032 और 2036 में होगा.
हर चार साल में लीप डे क्यों होता है?
लीप दिवस और वर्ष पृथ्वी की परिक्रमा से जुड़ा हुआ है. पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक पूर्ण परिक्रमा पूरा करने में जितने दिन लगते हैं वह पूर्ण संख्या नहीं है. पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365 दिन और लगभग छह घंटे लगते हैं और चार वर्षों में ये अतिरिक्त घंटे 24 घंटे बनते हैं जो एक अतिरिक्त दिन के बराबर होता है.
फरवरी में ही क्यों जुड़ता है एक दिन?
जूलियन कैलेंडर में दिसंबर की जगह फरवरी का महीना आखिरी माना जाता था जिस कारण एक अतिरिक्त दिन फरवरी के महीने में ही जोड़ा जाने लगा.
वहीं डेटा वैज्ञानिक और ए स्कीम ऑफ हेवन: द हिस्ट्री ऑफ एस्ट्रोलॉजी एंड द सर्च फॉर अवर डेस्टिनी इन डेटा के लेखक अलेक्जेंडर बॉक्सर के लिए लीप डे के कई अलग-अलग मायने हैं. उनका कहना है कि रोमन लोग इसे एक अशुभ महीना मानते थे. इसके अलावा, उन्हें विषम संख्याओं पर गहरा संदेह था. चूँकि फरवरी शुरू होने में केवल 28 दिन थे, इसलिए उन्होंने इसे फरवरी में जोड़ दिया.
हम लीप डे कब छोड़ते हैं?
लीप दिवस की गणना करते समय दशमलव समय की भरपाई के लिए, हम कभी-कभी लीप वर्ष छोड़ भी दिए है. जो कि एक दुर्लभ घटना है. 100 से विभाज्य लेकिन 400 से अविभाज्य वर्षों को छोड़ दिया जाता है, जिसका अर्थ है कि हमने 1700, 1800 और 1900 में लीप वर्ष को छोड़ दिया है लेकिन 2000 को नहीं छोड़ा. अगला लीप वर्ष जिसे हम छोड़ेंगे वह 2100 होगा.
लीप ईयर क्यों है जरुरी?
ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत के चार साल बाद पहला लीप ईयर आया था. अगर हर 4 साल में लीप ईयर को न फॉलो किया जाए तो हम समय चक्र से आगे निकल जाएंगे. चार साल में एक अतिरिक्त दिन अगर कैलेंडर में शामिल न किया जाए, तो 100 साल के बाद हम 25 दिन पीछे हो जाएंगे और ऐसी स्थिति में हमें जलवायु और मौसम के बदलाव का भी सही पता नहीं चल पायेगा.
लीप डे किसने बनाया?
ब्रिटानिका की रिपोर्ट के अनुसार, लीप दिनों को जोड़ने की अवधारणा नई नहीं है और यह बहुत पहले से चली आ रही है. जैसे कि हिब्रू, चीनी और बौद्ध कैलेंडर में लीप महीने शामिल होते हैं, जिन्हें "इंटरकैलेरी या इंटरस्टीशियल महीने" के रूप में भी जाना जाता है.
जबकि जूलियस सीज़र को अक्सर लीप दिनों की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है, उनका यह विचार मिस्रवासियों से प्रेरित था. नेशनल ज्योग्राफिक की रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक, मिस्रवासी एक सौर कैलेंडर को फॉलो करते थे, जो हर चार साल में एक लीप वर्ष के साथ 365 दिनों का होता था.
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