पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई राज्य सभा के लिए नामित

Mar 17, 2020, 15:11 IST

रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को डिब्रूगढ़, असम में हुआ था. वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र हैं.

Justice Ranjan Gogoi
Justice Ranjan Gogoi

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्य सभा हेतु नामित किया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनित किया है. इस संबंध में एक अधिसूचना गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई.

गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड 3 के साथ पठित खंड 1 के उपखंड क की शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने रंजन गोगोई को नामित किया है.

गोगोई को नामित क्यों किया गया?

पूर्व में नामित किए गए सदस्य के सेवानिवृत्त होने के वजह से खाली हुए पद को भरने हेतु राज्यसभा में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को नामित किया गया है.

रंजन गोगोई कौन हैं?

• रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को डिब्रूगढ़, असम में हुआ था. वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र हैं.

• उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट से वकालत की शुरुआत की थी. वे 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्त हुए. वे 12 फरवरी 2011 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने.

• पूर्व सीजेआई गोगोई ने 03 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में 23 अप्रैल 2012 को नियुक्त हुए थे.

• सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्होंने साल 1978 में बतौर एडवोकेट अपने करियर की शुरुआत की थी.

गोगोई द्वारा सुनाए गए कुछ ऐतिहासिक फैसले

सबरीमाला मामला: जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की. साथ ही मामले को सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय बड़ी बेंच को भेज दिया.

सात भाषाओं में फैसला: चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अंग्रेजी और हिंदी समेत सात भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को प्रकाशित करने का फैसला लिया था. इससे पहले तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले केवल अंग्रेजी में ही प्रकाशित होते थे.

अयोध्या मामला: सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन के उस मामले पर अंतिम फैसला सुनाया जो सैकड़ों सालों से चला आ रहा था. यह फैसला 09 नवंबर 2019 को आया था.

आरटीआई दायरे में सीजेआई कार्यालय: भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय अब सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आएगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 13 नवंबर 2019 को सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय है, इसलिए यह आरटीआई कानून के दायरे में आएगा. यह फैसला सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनाया.

सरकारी विज्ञापन में नेताओं की तस्वीर पर पाबंदी: मुख्य न्यायाधीश के तौर पर रंजन गोगोई और पीसी घोष की पीठ ने सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीर लगाने पर पाबंदी लगा दी थी.

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Vikash Tiwari is an content writer with 3+ years of experience in the Education industry. He is a Commerce graduate and currently writes for the Current Affairs section of jagranjosh.com. He can be reached at vikash.tiwari@jagrannewmedia.com
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