केंद्र सरकार ने देश में तीर्थस्थल और धरोहर स्थल विकसित करने की केंद्रीय योजना के तहत उत्तराखंड में गंगोत्री एवं यमुनोत्री, मध्य प्रदेश में अमरकंटक और झारखंड में पारसनाथ को शामिल किया है.
इन नये स्थलों के जुड़़ने से ‘पिलग्रिमेज रेजुवेनेशन एंड स्प्रीचुअल, हेरिटेज ऑगमेंटेशन ड्राइव’ (प्रसाद) यानी ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प एवं आध्यात्मिक संवर्धन मुहिम’ योजना में स्थलों की संख्या बढ़कर 25 राज्यों में 41 हो गयी है.
अनुमानित लागत:
बयान के अनुसार 15 राज्यों में कुल 24 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गयी है. इनकी अनुमानित लागत 727.16 करोड़ रुपये है. योजना के आरंभ के बाद से इन परियोजनाओं के लिये कुल 331.15 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं.
केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय राज्यों को पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु केन्द्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करता है. केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक कार्य हेतु 100 प्रतिशत फंडिंग प्रदान की जाती है. पर्यटन स्थलों के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी (Public–private partnership) तथा कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (Corporate social responsibility) के तहत भी कार्य किया जा सकता है.
प्रसाद योजना:
प्रसाद योजना, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई योजना है इस योजना के तहत देश के पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है. केंद्र सरकार ने 2014-15 में प्रसाद योजना की शुरुआत की थी.
इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों का विकास सतत, योजनाबद्ध तथा प्रमुखता से करना है. इस योजना के तहत धार्मिक पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण के लिए कार्य किया जायेगा.
देश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है क्योंकि हमारा देश भारत हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन और सूफीवाद जैसे कई धर्मों का देश है. मिशन की रणनीति के हिस्से के रूप में वैसे धार्मिक स्थान जिन्हें विश्व स्तरीय पर्यटन उत्पादों के तौर पर पेश किया जा सकता है की पहचान की जा रही है और वहां प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी ढांचे विकसित किए जा रहे हैं.
योजना का लक्ष्य:
योजना का लक्ष्य प्रवेश बिंदुओं (सड़क, रेल और जल परिवहन), अंतिम मील तक संपर्क, सूचना/दुभाषिया केंद्र, एटीएम/मुद्रा विनिमय, पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की सुविधाएं, प्रकाश एवं ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों से रोशनी, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, अमानत घर, प्रतिक्षा कक्ष, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, शिल्प बाजार/हाट/स्मारिका दुकान/भोजनालय, वर्षा के लिये आश्रय स्थल, टेलीकॉम सुविधाएं, इंटरनेट संपर्क आदि का विकास जैसी बुनियादी पर्यटन सुविधाएं इत्यादि पर आधारित बुनियादी ढांचा विकसित करना है.
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