भारतीय वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया 27 मई 2020 को वायुसेना के नंबर 18 स्क्वाड्रन फ्लाइंग बुलेट को सुलूर एयरबेस पर उड़ाएंगे. यह स्क्वाड्रन एलसीए तेजस एफओएस विमान से लैस होगा और एलसीए तेजस को उड़ाने वाला दूसरा यह वायुसेना का दूसरा स्क्वाड्रन होगा.
भारतीय वायुसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि स्क्वाड्रन में हल्के लड़ाकू विमान तेजस को शामिल किया जाएगा और तेजस विमानों वाली भारतीय वायु सेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन होगी. तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किया गया है.
मुख्य बिंदु
भारतीय वायुसेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया इस फ्लाइंग बुलेट को ऑपरेशनल करेंगे. कार्यक्रम का आयोजन कोयंबटूर के पास सुलूर एयरफोर्स स्टेशन पर होगा.
रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तेजस को उड़ाने वाली वायुसेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन होगी. इससे पहले 45 वीं स्क्वाड्रन ऐसा कर चुकी है.
विमान वाहक पोत पर तेजस की सफल लैंडिंग और टेकऑफ के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया था जो ऐसे लड़ाकू विमानों की डिजाइन में सक्षम हैं और संचालन विमानवाही पोत से किया जा सकता है.
भारतीय वायु सेना ने पहले ही 40 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया है और जल्दी ही एचएएल को 83 और विमानों का ऑर्डर दिया जा सकता है जिसमें करीब-करीब 38,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
1971 के युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई
पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने वाली इस स्क्वाड्रन को 15 अप्रैल 2016 को सेवा मुक्त कर दिया गया था. इससे पहले इसमें मिग-27 विमान शामिल थे. स्क्वाड्रन को 01 अप्रैल 2020 को पुनः शुरू किया गया था. इस स्क्वाड्रन को नवंबर 2015 में राष्ट्रपति द्वारा ध्वज प्रदान किया गया था.
तेजस लड़ाकू विमान के बारे में
तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. तेजस भारत द्वारा विकसित किया जा रहा एक हल्का और कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है. यह हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला, अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम एक हल्का युद्धक विमान है.
विमान का आधिकारिक नाम तेजस 04 मई 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था. तेजस की सीमित श्रृंखला का उत्पादन साल 2007 में शुरू हुआ. दो सीटों वाला एक ट्रेनर संस्करण विकसित किया जा रहा है, क्योंकि इसका नौसेना संस्करण भारतीय नौसेना के विमान वाहक पोतों से उड़ान भरने में सक्षम है. एलसीए के कार्यक्रम का अन्य मुख्य उद्देश्य भारत के घरेलू एयरोस्पेस उद्योग की चौतरफा उन्नति के वाहक के रूप में कार्य करना था.
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