कोविड-19 के कारण भारत में छाई आजादी के बाद सबसे गंभीर आर्थिक मंदी: क्रिसिल

May 27, 2020, 10:58 IST

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि आजादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. एजेंसी का कहना है कि आजादी के बाद इससे पहले तीन बार अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आई थी.

India facing its worst recession in current fiscal says Crisil in Hindi
India facing its worst recession in current fiscal says Crisil in Hindi

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने 26 मई 2020 को कहा कि भारत अबतक की सबसे खराब मंदी की स्थिति का सामना कर रहा है. उसने कहा कि आजादी के बाद यह चौथी और उदारीकरण के बाद पहली मंदी है जो सबसे भीषण है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के मुताबिक कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी तथा उसकी रोकथाम के लिये जारी 'लॉकडाउन' से अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष में 5 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है.

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि आजादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. एजेंसी का कहना है कि आजादी के बाद इससे पहले तीन बार अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आई थी. लेकिन कोरोना वायरस (कोविड-19) की वजह से लॉकडाउन ने सबसे ज्यादा भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका दिया है. भारतीय अर्थव्यवस्था में सामान्य ग्रोथ के लिए कम से कम 3 साल से 4 साल का समय लग जाएगा.

जीडीपी में 5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान

रेटिंग एजेंसी के अनुसार लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है. एजेंसी क्रिसिल ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के जीडीपी ग्रोथ रेट में 5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है. इससे पहले 28 अप्रैल को क्रिसिल ने जीडीपी ग्रोथ रेट को 3.5 प्रतिशत से घटाकर 1.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. एजेंसी क्रिसिल की मानें तो पिछले एक महीने में आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है.

साल में तीन बार मंदी आई

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मानना है कि पिछले 69 सालों के आंकड़ों को देखें तो देश में केवल तीन बार साल 1958, साल 1966 और साल 1980 में मंदी आई थी. इन तीनों मंदी की एक ही वजह मानसून का साथ नहीं देना था. खराब मानसून के कारण से खेती पर काफी बुरा असर पड़ा था और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था.

टूरिज्म जैसे सेक्टर का सबसे बुरा हाल

क्रिसिल के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली है. टूरिज्म जैसे सेक्टर का सबसे बुरा हाल है. रोजगार और आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा क्योंकि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को कामकाज मिला हुआ है.

कृषि में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान

क्रिसिल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में मंदी कुछ अलग है, क्योंकि इस बार कृषि के मोर्चे पर राहत है, क्योंकि अनुमान लगाया गया है कि मानसून सामान्य रहेगा. अर्थव्यवस्था के लिए एकमात्र यही अच्छी खबर है. रेटिंग एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि गैर-कृषि जीडीपी में 6 फीसदी की गिरावट आएगी. जबकि कृषि में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है.

Vikash Tiwari is an content writer with 3+ years of experience in the Education industry. He is a Commerce graduate and currently writes for the Current Affairs section of jagranjosh.com. He can be reached at vikash.tiwari@jagrannewmedia.com
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