वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत 2022 में रेमिटेंस में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर से अधिक प्राप्त करेगा, जानें रेमिटेंस के बारें में

India Remittances 2022: रेमिटेंस की दुनिया में भारत अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखते हुए, वर्ष 2022 में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर से अधिक प्राप्त कर रहा है. जिससे भारत रेमिटेंस फ्लो प्रतिशत मामले में चीन, मेक्सिको और फिलीपींस से आगे निकल जायेगा. जानें रेमिटेंस के बारें में   

भारत 2022 में रेमिटेंस में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर से अधिक प्राप्त करेगा
भारत 2022 में रेमिटेंस में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर से अधिक प्राप्त करेगा

India Remittances 2022: रेमिटेंस (remittance) की दुनिया में भारत अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखते हुए, वर्ष 2022 में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर से अधिक प्राप्त कर रहा है यानि विदेश में रह रहे भारतीय इस वर्ष 100 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक भारत में भेजने जा रहे है. यह रिपोर्ट वर्ल्ड बैंक द्वारा दी गयी है. 

वर्ल्ड बैंक के अनुसार कोविड और अन्य विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद यह राशि अपने आप में काफी बड़ी है. जिससे भारत रेमिटेंस फ्लो प्रतिशत मामले में चीन, मेक्सिको और फिलीपींस से आगे निकल जायेगा. 

रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

रेमिटेंस फ्लो के मामले में लैटिन अमेरिका और कैरिबियन रीजन में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि, साउथ एशिया में 3.5 प्रतिशत, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में 2.5 प्रतिशत और पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया गया है.     

भारत में रेमिटेंस फ्लो में 12 प्रतिशत की वृद्धि:

वर्ल्ड बैंक की प्रवासन और विकास रिपोर्ट में कहा गया है कि इस रेमिटेंस आकड़े से भारत में रेमिटेंस फ्लो में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जाएगी. जिससे भारत में रेमिटेंस फ्लो परसेंटेज के मामले में चीन, मेक्सिको और फिलीपींस से आगे निकल जायेगा. भारत के अलावा साउथ एशिया में रेमिटेंस (प्रेषण) अनुमानित 3.5 प्रतिशत बढ़कर 163 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया है.

भारत को 2022 में कैसे मिला रिकॉर्ड रेमिटेंस: 

  • भारत को रिकॉर्ड रेमिटेंस, भारत से बाहर रह रहे भारतियों द्वारा भेजा जा रहा पैसा है. रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर जैसे धनी देशों में रह रहे भारतीय वहां से पैसा भेज रहे है.   
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) देशों में वेतन वृद्धि और एक मजबूत श्रम बाजार भारत में रेमिटेंस को बढ़ावा दिया है. 
  • गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के गंतव्य देशों में, 2022 की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में 200 अमेरिकी डॉलर भेजने की लागत औसतन 4.1 प्रतिशत थी, जो एक साल पहले के 4.3 प्रतिशत से कम है.
  • 2022 में विकासशील क्षेत्रों में रेमिटेंस फ्लो को कई कारकों द्वारा बढ़ाया गया. COVID-19 महामारी के बाद मेजबान अर्थव्यवस्थाओं के फिर से खुलने से प्रवासियों को रोजगार मिलने शुरू हुए.

भारतीय रेमिटेंस के स्रोत क्या है?

उच्च आय वाले देशों से भारत में नकद हस्तांतरण 2020-21 में 36% से अधिक हो गया, जो 2016-17 में 26% था.

भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3 प्रतिशत के लिए प्रेषण लेखांकन भी राजकोषीय समूहों को भरने के लिए महत्वपूर्ण है.

संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब सहित पांच खाड़ी देशों की हिस्सेदारी विश्व बैंक की समान अवधि में 54% से घटकर 28% हो गई. जिनके कारण भारत में रेमिटेंस फ्लो में वृद्धि हुई.

रेमिटेंस क्या होता है?

रेमिटेंस या प्रेषण विदेश में कार्य कर रहे किसी देश के नागरिक द्वारा अपने देश में घरेलू आय के लिए भेजा गया धन का एक गैर-वाणिज्यिक हस्तांतरण है. प्रवासियों द्वारा घर भेजा गया पैसा उस देश के सकल घरेलू उत्पाद में प्रमुख बढ़ोत्तरी करता है. जो किसी विकासशील देश के लिए महत्वपूर्ण है.

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