भारतीय सेनाओं को चीन से लगनी वाली सीमा पर निगरानी रखने में विशेष मदद मिलने वाली है. दरअसल जल्द ही इजरायल के हेरॉन ड्रोन (Heron Drone) भारत को मिल जाएंगे. इस ड्रोन के जरिए सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और लद्दाख में और पैनी निगरानी कर पाएंगी.
इन ड्रोन का इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख और चीन की सीमा के साथ अन्य क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए किया जाएगा. भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में तैनाती के लिए जल्द ही चार इजरायली ड्रोन मिलने जा रहे हैं. हालांकि, कोरोना महामारी की वजह से ड्रोन की डिलीवरी में देरी हुई है.
पिछले वर्जन की तुलना में काफी बेहतर
जल्द ही भारत आने वाले ये ड्रोन मौजूदा इन्वेंट्री में हेरॉन की तुलना में ज्यादा एडवांस हैं और उनकी एंटी-जैमिंग क्षमता उनके पिछले वर्जन की तुलना में काफी बेहतर है. चीन की तरफ से पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच भारत ने सितंबर माह में इजरायल के बने हेरॉन ड्रोन को अपग्रेड करने के लिए अनुरोध किया था.
500 करोड़ रुपये का इमरजेंसी फंड जारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने चीन से जारी विवाद के बीच 500 करोड़ रुपये का इमरजेंसी फंड जारी किया था. इन ड्रोन की खरीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से दिए गए आपात वित्तीय अधिकार के तहत की गई है.
इजरायली हेरॉन ड्रोन क्या है?
इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने निगरानी करने वाले उपकरणों में खास ड्रोन तैयार किए हैं. इन खास एयरक्राफ्ट को आज के आधुनिक युद्ध स्थलों से खुफिया जानकारी हासिल करने में महारत है. हेरॉन या माकात्ज एक मीडियम एल्टीट्यूड का मानव रहित विमान (UAV) है. इसे खास तौर पर निगरानी और सर्विलियंस ऑपरेशन्स के लिए बनाया गया है. इसे आईएआई ने अपने माल्टा विभाग में बनाया है.
यह ड्रोन कैसे काम करता है?
यह सिस्टम पूरी तरह से स्वचालित है और इसके उड़ान भरने और उतरने के दौरान विपरीत मौसमी हालातों में भी कोई परेशानी नहीं होती है. हेरॉन 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और यह इसे चलाने वालों को युद्ध के मैदान पर रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है. यह जीपीएस नेवीगेशन सिस्टम के जरिए निगरानी का काम करता है.
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