जूट की खेती को बेहतर करने हेतु पश्चिम बंगाल और असम के कुछ ब्लॉकों में वर्ष 2015 में शुरू की गई जूट-आई केयर परियोजना के अच्छे परिणाम मिले हैं. संशोधित कृषि आर्थिक व्यवहार में पैदावार 10-15 प्रतिशत बढ़ाने हेतु क्यारीबद्ध तरीके से पटसन की बुआई, खर-पतवार प्रबंधन लागत में कमी के लिए हाथ की जगह मशीनों से खर-पतवार प्रबंधन शामिल हैं. इसका उद्देश्य नई विकसित जूट भिगोने की सूक्ष्मजीवी तकनीक और बेहतर कृषि प्रक्रिया को लोकप्रिय बनाना है.
जूट और संबद्ध रेशा अनुसंधान के लिए केन्द्रीय अनुसंधान संगठन (सीआरआईजेएएफ) ने सोना नामक माइक्रोबायरल कंर्सोटियम विकसित किया है ताकि रेशे की उत्पादकता 20 प्रतिशत बढ़ाई जा सके और गुणवत्ता की दृष्टि से इसमें डेढ ग्रेड वृद्धि की जा सके.
परियोजना के दौरान विभिन्न अंतरालों पर प्रत्येक किसान को औसतन 50 एसएमएस भेजे जाते हैं. जूट उत्पादकता में सुधार पर पंजीकृत किसानों को क्षेत्रीय भाषाओं में एसएमएस भेजे जाते हैं. प्रदर्शनी उद्देश्य से बीज छेदन यंत्र और खत-पतवार प्रबंधन यंत्र भेजे गए हैं. इन पहलों से प्रति हेक्टेयर पटसन किसानों की आय 10,000 रुपये से अधिक बढ़ी है.
इससे संबंधित मुख्य तथ्य:
• सभी मुख्य मंत्रियों को सलाह दी गई है कि वे जूट आई-केयर कार्यक्रम को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत लें और कृषि विकास केंद्रों (केवीके) के माध्यम से प्रमाणित पटसन बीज उपयोग के लिए किसानों को जागरूक बनायें.
• राज्यों से कृषि मिशन में उप-मिशन (एसएमएएम) के अंतर्गत कृषि उपकरणों की सप्लाई करने और मनरेगा तथा आरकेवीवाई के अंतर्गत नमी के लिए टैंक बनाने का भी अनुरोध किया गया है.
• वस्त्र मंत्रालय के राष्ट्रीय पटसन बोर्ड ने 22 मई 2017 को राष्ट्रीय बीज निगम तथा भारतीय पटसन निगम के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया.
• यह ज्ञापन वर्ष 2018 के लिए पटसन किसानों को 800 मीट्रिक टन नए किस्म के पटसन बीज और वर्ष 2019 के लिए 1500 मीट्रिक टन नए किस्म के पटसन बीज की सप्लाई करने के लिए है.
• जूट और संबद्ध रेशा अनुसंधान में एनजेबी के सहयोग से सीआरआईजेएएफ तथा राष्ट्रीरय पटसन और संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान (एनआईआरजेएएफटी) की अग्रिम पंक्ति की प्रदशर्नियों को स्वीकृति दी गई है.
• जूट आई-केयर परियोजना की लोकप्रियता इस तथ्य से भी प्रमाणित होती है कि वर्ष 2017 में परियोजना के अंतर्गत पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या 147 प्रतिशत बढ़ी और यह 103122 हो गई.

Comments
All Comments (0)
Join the conversation