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विनय सहस्त्रबुद्धे आईसीसीआर के नए अध्यक्ष नियुक्त

विनय सहस्त्रबुद्धे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है. विनय सहस्रबुद्धे भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, वे महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य भी हैं. विनय सहस्त्रबुद्धे को लोकेश चंद्र के स्थान पर नियुक्त किया गया है, लोकेश चंद्र को अक्टूबर 2014 में आईसीसीआर के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था. उनके तीन साल के कार्यकाल की अवधि पूरी हो चुकी है. वह एक विख्यात विद्वान और विचारक भी थे.

Dec 31, 2017 09:42 IST
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विनय सहस्त्रबुद्धे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है. विनय सहस्रबुद्धे भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. वे महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य भी हैं. विनय सहस्त्रबुद्धे को लोकेश चंद्र के स्थान पर नियुक्त किया गया है, लोकेश चंद्र को अक्टूबर 2014 में आईसीसीआर के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था और अब उनके तीन साल के कार्यकाल की अवधि पूरी हो चुकी है. वह एक विख्यात विद्वान और विचारक थे.

विनय सहस्रबुद्धे के बारे में-
विनय सहस्त्रबुद्धे दक्षिण एशिया के चुने गए प्रतिनिधियों और स्वैच्छिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के एकमात्र प्रशिक्षण और अनुसंधान अकादमी ‘रामभाऊ माल्गी प्रबोधिनी’ के उपाध्यक्ष हैं. वह एक दशक से अधिक समय तक बीजेपी के प्रशिक्षण कक्ष का नेतृत्व करते  रहे. वर्तमान में वह भारतीय जनता पार्टी के नीति अनुसंधान एवं सुशासन विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी भी हैं.

आईसीसीआर के बारे में-
आईसीसीआर (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) को 1950 में भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने स्थापित किया. वह आईसीसीआर के पहले अध्यक्ष भी थे.
पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा और के.आर. नारायणन, पूर्व प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिंह राव और अटल बिहारी वाजपेयी भी आईसीसीआर (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) के के अध्यक्ष रह चुके हैं.

आईसीसीआर का मुख्य उद्देश्य-

  1. भारत के विदेशी सांस्कृतिक संबंधों से संबंधित नीतियां और कार्यक्रम तैयार करना और उनके कार्यान्वयन में भाग लेना;
  2. भारत और अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और आपसी समझ को बढाकर और मजबूत करना;
  3. अन्य देशों और लोगों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना;
  4. संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ संबंध स्थापित करना और विकसित करना;
  5. इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाना.

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