राज्य सभा ने 16 मार्च 2020 को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 पारित किया. यह भारत में तीन विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करेगा. राज्य सभा ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 ध्वनिमत से पारित किया.
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में कहा कि संस्कृत साहित्य का सबसे बड़ा भंडार और भारत की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिसकी एक अलग पहचान है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने समूचे विश्व को संस्कृत के माध्यम से ज्ञान दिया है.
विधेयक का उद्देश्य
इस विधेयक का उद्देश्य भारत के तीन मानद विश्वविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बदलना है. भारत में उन उच्चतर शिक्षा संस्थाओं को मानद विश्वविद्यालय (डीम्ड यूनिवर्सिटी) कहते हैं जिन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सलाह पर भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस प्रकार की मान्यता दी जाती है.
तीन संस्कृत विश्वविद्यालय
विधेयक तीन विश्वविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के रूप में उन्नत करने में सक्षम होगा. राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली, श्री लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ दिल्ली और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति की पहचान अब केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में होगी.
महत्व
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हम सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त करने के पक्षधर हैं. हम प्रत्येक भारतीय भाषा के ज्ञान के भंडार का उपयोग करेंगे. यदि संस्कृत सशक्त होगी तो सभी भारतीय भाषाएं भी सशक्त होंगी. इस विधेयक के कानून बनने के बाद दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ और तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाएगा.
पृष्ठभूमि
राज्यसभा से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित हो गया. ये विधेयक लोकसभा से दिसंबर में ही पारित हो चुका है. यह राज्यसभा में मानव संसाधन विकास मंत्री, रमेश पोखरियाल 'निशंक' द्वारा पेश किया गया था. केंद्रीय दर्जा मिलने से इन विश्वविद्यालयों में सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा.
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