एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने 24 जून 2021 को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को 11 प्रतिशत से घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया. इसके साथ चेतावनी भी दी, रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कोविड-19 महामारी से जुड़े जोखिम आगे भी बने हुए हैं.
रेटिंग एजेंसी ने वृद्धि के अनुमान को यह कहते हुए घटाया कि अप्रैल-मई में कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से राज्यों द्वारा लॉकडाउन लगाए जाने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी से कमी आई. एजेंसी ने कहा कि हमने मार्च में घोषित चालू वित्त वर्ष में वृद्धि के लिए 11 प्रतिशत के पूर्वानुमान को घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया है.
भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की कमी
एसएंडपी ने कहा कि महामारी को लेकर आगे भी जोखिम बने हुए हैं क्योंकि अभी तक लगभग 15 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की एक खुराक मिली है. हालांकि, अब वैक्सीन की आपूर्ति में तेजी आने की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की कमी आई थी और इससे पहले वित्त वर्ष 2019-20 में देश ने चार प्रतिशत की वृद्धि हासिल की थी.
भारत की ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की बैलेंस शीट हुए नुकसान से अगले कुछ सालों के दौरान ग्रोथ रेट बाधित होगी और 31 मार्च 2023 को खत्म होने वाले अगले वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत रह सकती है.
मूडीज ने भी रेटिंग घटाई
मूडीज ने भी 23 जून को वर्ष 2021 के लिए भारत के वृद्धि अनुमान (India growth forecast) को घटाकर 9.6 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछले अनुमान के मुताबिक 13.9 प्रतिशत था. मूडीज ने साथ ही कहा कि तेजी से टीकाकरण के कारण जून तिमाही में आर्थिक प्रतिबंध सीमित होंगे.
RBI ने भी कटौती की
बीते वित्त वर्ष 2020-21 में देश की अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. जबकि उससे पहले 2019-20 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 4 प्रतिशत थी. जबकि इसी महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में देशी की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 9.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था, जबकि पहले ये 10.5 प्रतिशत था.
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