श्रीलंका कैबिनेट ने 25 जुलाई 2017 को हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करने हेतु संशोधित समझौता को स्वीकृति प्रदान कर दी. श्रीलंका के इस कदम से भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राहत मिलेगी. हंबनटोटा पोर्ट की गिनती दुनिया के सबसे बिजी शिपिंग लेन में की जाती है.
श्रीलंका ने चीन की कंपनी के साथ हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करने हेतु समझौता किया था. हंबनटोटा पोर्ट एशिया में आधुनिक सिल्क रूट का अहम हिस्सा है. चीन द्वारा इसका प्रयोग नेवी बेस के तौर पर भी किए जाने की आशंका थी. इस समझौते का श्रीलंका में भी बड़े पैमाने पर जनता ने र्विरोध किया गया.
मुख्य तथ्य-
दुनिया के सर्वाधिक व्यस्त शिपिंग लेन में गिना जाने वाला हंबनटोटा पोर्ट तब विवादों में आया जब निजीकरण के प्रयासों के तहत इसके चीनी कंपनी के हाथों में जाने की बात आई.
चीन के स्वामित्व वाली कम्पनी चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स ने 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 9 हजार 7 करोड़ रुपये) में इस पोर्ट को विकसित करने का समझौता किया. समझौता के तहत चीनी कंपनी को हंबनटोटा पोर्ट में 80 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात हुई.
संशोधित समझौता-
- रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार नई डील के तहत श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह पर वाणिज्यिक परिचालन में चीन की भूमिका को सीमित करने की मांग की है.
- बंदरगाह पर व्यापक सुरक्षा निगरानी खुद के पास ही रखने को कहा है.
- इंडस्ट्रियल जोन डिवेलप करने के नाम पर चीन की योजना यहां 15000 एकड़ (23 स्क्वॉयकर मील) जमीन अधिगृहित करने की थी.
- नए समझौते के अनुसार पोर्ट पर वाणिज्यिक परिचालन के बंटवारे हेतु दो कंपनियां बनाई जा रही हैं.
- दोनों कंपनी पोर्ट और इसके टर्मिनल्स पर गतिविधियों का संचालन करेगी.
- चीनी कंपनी की पूंजी 794 मिलियन डॉलर होगी.
- सहयोगी देशों मुख्यतौर पर भारत, जापान और अमेरिका की चिंताओं का ख्याल रखते हुए व्यवस्था की गई है कि इसका इस्तेमाल मिलिटरी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नहीं किया जाएगा.
- हंबनटोटा इंटरनैशनल पोर्ट ग्रुप में चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग की 85 फीसदी हिस्सेदारी होगी. बाकी 15 फीसदी हिस्सा श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी के पास होगा.
सुरक्षा संबंधित गतिविधियां-
- सुरक्षा संबंधित गतिविधियों का जिम्मा मुख्यतया श्रीलंका के पास होगा.
- एक दूसरी फर्म हंबनटोटा इंटरनैशनल पोर्ट ग्रुप सर्विस कंपनी बनाई जाएगी जिसके पास पोर्ट पर सिक्यॉरिटी ऑपरेशन का जिम्मा होगा.
- इस कंपनी की पूंजी 606 मिलियन डॉलर होगी.
- इसमें श्रीलंका की हिस्सेदारी 50.7 फीसदी और चीन की हिस्सेदारी 49.3 फीसदी होगी.
पोर्ट सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है. इस पोर्ट पर चीनी नेवी के हस्तक्षेप की आशंकाओं को देखते हुए भारत ने श्रीलंका से अपनी चिंताएं जाहिर की थीं. श्रीलंका के राजनेताओं ने इतने बड़े जमीन के टुकड़े का नियंत्रण चीन के पास जाने को देश की संप्रभुता के साथ समझौते के रूप में भी चिंता व्यक्त की थी.

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