कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से संक्रमित लोग अब हैप्पी हाइपोक्सिया जानलेवा बीमारी के शिकार हो रहे हैं. कोरोना की दूसरी लहर में बदले लक्षणों ने सबसे ज्यादा युवाओं को अपनी चपेट में लिया है. कोरोना संक्रमितों में हैप्पी हाइपोक्सिया जानलेवा साबित हो रहा है.
विशेषज्ञ कोरोना मरीजों की अचानक बिगड़ती तबियत के पीछे हैप्पी हाइपोक्सिया को मान रहे हैं. सामान्य कोरोना मरीजों में ये लक्षण ज्यादा हैं और बुखार, खांसी नहीं होने की वजह से जब तब आक्सीजन का स्तर कम होता है, तब तक हालत ज्यादा ही बिगड़ जाती है.
हैप्पी हाइपोक्सिया क्या होता है?
ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हो जाता है, लंग्स में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है. इससे ब्लड वेसल्स में क्लॉट भी जम जाते हैं. इसमें ऑक्सीजन सेचुरेशन 50 तक भी पहुंच जाता है. नॉर्मल ऑक्सीजन 95 से 100 तक होना चाहिए. ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होता है उसे हैप्पी हाइपोक्सिया कहते हैं.
हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण क्या है?
हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण में स्किन का रंग हल्का नीले रंग का दिखना, पसीना आना, बॉडी का रंग बदलना, चक्कर आना और सिरदर्द, होठ काले पड़ना तथा चिड़चिड़ापन होना इत्यादि है.
हैप्पी हाइपोक्सिया का समाधान क्या है?
हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण सामने नहीं आते हैं इसलिए सावधान रहें. शरीर में, रंग में बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ऑक्सीमीटर से सेचुरेशन लेवल चेक करें और डॉक्टर से संपर्क करें. इस बीमारी को साइलेंट किलर कहा गया है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल कम हो जाता है और एकदम से उसकी मृत्यु हो जाती है.
क्या यह बीमारी कोविड से जुड़ी है?
यह बीमारी कोविड से जुड़ी है. कोविड मरीज में सबसे पहले ऑक्सीजन लेवल कम होता है. यह एक तरह का साइलेंट किलर है. शुरुआत में इस बीमारी को समझ नहीं पाते हैं. लक्षण साफ नजर नहीं आते हैं.
हैप्पी हाइपोक्सिया का कारण क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जाने को माना जाता है. इसकी वजह से फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने लगता है. विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपोक्सिया की वजह से दिल, दिमाग, किडनी जैसे शरीर के प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं.
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