विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 27 मई 2020 वैश्विक महामारी की चुनौतियों से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन नामक एक संस्था का घोषणा किया है. पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है. इस फाउंडेशन के तहत किसी महामारी से निपटने हेतु फंडिंग इकट्ठी की जाएगी, जिसमें ना सिर्फ बड़े देशों बल्कि आम लोगों से भी सहायता ली जाएगी.
डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर टेड्रोस अधानम घेब्रेयसस ने 27 मई 2020 को इसकी घोषणा की, ये एक स्वतंत्र संगठन होगा. जिसमें मौजूदा तरीकों से अलग हटकर फंडिंग को जुटाया जाएगा. उन्होंने एक वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इस संस्था के निर्माण का प्रस्ताव 2018 के फरवरी माह से ही लंबित है.
डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह फाउंडेशन वैश्विक स्तर पर लोगों के स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए संगठन को फंड मुहैया कराएगी लेकिन वैधानिक तौर पर यह डब्ल्यूएचओ से अलग होगी. डब्ल्यूएचओ के एक प्रवक्ता ने हाल ही में प्रेस रिलीज में कहा कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन शुरू में इमर्जेंसी व महामारी के प्रति रेस्पॉन्स के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के लिए फंड जुटाकर इसे वितरित करने पर फोकस करेगी.
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल न किया जाए
संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस ने इससे पहले कहा था कि लैंसेट मेडिकल जर्नल में पिछले सप्ताह प्रकाशित एक पेपर के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है कि कोविड-19 के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल न किया जाए क्योंकि यह हृदय के लिए घातक है और इससे जान भी जा सकती है.
WHO को दी जाने वाली सहायता राशि पर रोक
अभी डब्ल्यूएचओ को हर सदस्य देश अपनी ओर से सहायता राशि देता है, उसी के आधार पर विश्वभर में आने वाले मुश्किलों को लेकर डब्ल्यूएचओ किसी तरह की मदद करता है. बीते दिनों अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली सहायता राशि पर रोक लगा दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने डब्ल्यूएचओ पर कोरोना वायरस को पहचानने में फेल होने का आरोप लगाया था और चीन का साथ देने को लेकर आलोचना की थी.
संगठन द्वारा हाल ही में घोषणा
गौरतलब है कि बीते दिनों ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से बयान दिया गया था कि उसका मौजूदा बजट 2.3 बिलियन डॉलर है, जो कि वैश्विक संस्था के तौर पर काफी कम है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी कहा था कि अमेरिका की ओर से फंडिंग रुक गई है, इसलिए हमें और ज्यादा फंडिंग की जरूरत है.
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