बाजार नियामक संस्था सेबी ने इंडस्ट्रियल फाइनेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (आईएफसीआई) में सरकारी हिस्सेदारी बढ़ाकर 55.57 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की. मंजूरी के पहले इसमें केंद्र सरकार की मात्र 0.0000011 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. इस मंजूरी से आईएफसीआई को सरकारी कंपनी बनने का रास्ता भी साफ़ हो गया. इसके लिए आम निवेशकों से शेयर खरीद के लिए खुली बोली नहीं लगानी पड़ेगी. सेबी ने यह मंजूरी 24 सितंबर 2012 को दे दी.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2012 में आईएफसीआई (इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड) के अपने पास पड़े 923 करोड़ रुपए के ऋण पत्रों को शेयर में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. केंद्र सरकार ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना पहले ही बना रखी थी और वित्त मंत्रालय ने सेबी को 29 अगस्त 2012 को पत्र लिखकर खुली पेशकश की अनिवार्यता में छूट देने मांग की.
आईएफसीआई औद्योगिक परियोजनाओं के लिए ऋण देती है. कंपनी का कोई प्रवर्तक नहीं है, लेकिन एलआईसी इसकी प्रमुख शेयरधारक है.
सेबी के अधिग्रहण संबंधी नियमों के मुताबिक यदि कोई निवेशक किसी सूचीबद्ध कंपनी में अपनी हिस्सेदारी अधिग्रहण के द्वारा 25 प्रतिशत या इससे अधिक कर लेता है तो उसे अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए आम शेयरधारकों के समक्ष खुला प्रस्ताव रखना होता है.
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