उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित 10 राज्यों को केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा स्थापित कृषि कर्मण पुरस्कार के लिए चुना गया. यह पहला ऐसा अवार्ड है जो राज्यों को देश का खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने की दिशा में किये गये प्रयास और योगदान के लिए दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विजेता राज्यों को नवसृजित कृषि कर्मण अवार्ड से सम्मानित करेंगे.
यह पुरस्कार दो श्रेणियों प्रथम श्रेणी में तीन पुरस्कार कुल खाद्यान्न उत्पादन के लिए तथा द्वितीय श्रेणी में चार पुरस्कार चावल, गेहूं, मोटे अनाज और दलहनों के उत्पादन के लिए दिए जाने का निर्णय लिया गया है. ये चारों अनाज यानी चावल, गेहूं, मोटे अनाज और दलहन देश के प्रमुख खाद्यान्न हैं.
प्रथम श्रेणी के पुरस्कार: (i) एक करोड़ टन से भी अधिक खाद्यान्न उत्पादन करने वाले राज्यों की श्रेणी में: पंजाब और उत्तर प्रदेश को संयुक्त रूप से दिया गया.
(ii) दस लाख से एक करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न का उत्पादन करने वाले राज्यों की श्रेणी में: असम और उड़ीसा संयुक्त से दिया गया.
(iii) दस लाख टन से कम खाद्यान्न उत्पादन करने वाले राज्यों की श्रेणी में: त्रिपुरा
दूसरे श्रेणी के पुरस्कार: इस वर्ग के चार पुरस्कार निजी फसल और फसल समूहों के लिए दिए गए.
(i) चावल के लिए: छत्तीसगढ़
(ii) गेहूं के लिए: हरियाणा
(iii) दलहन के लिए: महाराष्ट्र एवं राजस्थान
(iv) मोटे अनाज के लिए: कर्नाटक
पुरस्कार जीतने वाले प्रत्येक राज्य को एक ट्राफी, एक प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिए जाते हैं. कुल खाद्यान्न उत्पादन हेतु प्रत्येक राज्य के लिए नकद पुरस्कार दो करोड़ रुपए का तथा खाद्यान्नों में आने वाली चार अलग अलग फसलों के लिए एक-एक करोड़ रुपए की नकद राशि पुरस्कार के रूप में दिए जाते हैं.
कृषि एवं सहकारिता विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक चयन समिति वस्तुपरक मानदंडों के आधार पर राज्यों के प्रदर्शन का आकलन कर विजेताओं का चयन करती है.
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