दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को उनके जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं से मिले उपहारों पर आयकर अधिनियम के तहत कर नहीं लगाने का निर्णय दिया. दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सिकरी और सुरेश कैत की पीठ ने आयकर विभाग की अर्जी को खारिज करते हुए यह निर्णय दिया.
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सिकरी और सुरेश कैत की पीठ ने अपने निर्णय में बताया कि इस बात का सबूत नहीं है कि माया ने इन उपहारों के बदले इनको देने वालों को फायदा पहुंचाया हो. क्योंकि सभी उपहार देने वालों ने यह स्वीकारा है कि वह मुख्यमंत्री द्वारा गरीबों के लिए किए जा रहे कामों के लिए उनके प्रशंसक है. साथ ही मायावती ने अपने कानूनी धर्म को निभाते हुए विभाग के सामने सभी उपहारों का खुलासा कर दिया था.
ज्ञातव्य हो कि वर्ष 2003-04 के इस मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आइटीएटी) ने वर्ष 2007 में मायावती के पक्ष में आदेश दिया था. आइटीएटी ने आदेश में कहा था कि माया को पार्टी सहयोगियों से मिले उपहार पर आयकर अधिनियम के तहत टैक्स नहीं वसूला जा सकता है. आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्णय को आयकर विभाग द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी.
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