6 मई 2015 को कनाडा के हाउस ऑफ कॉमंस ने सी-51 विधेयक (आतंकवाद विरोधी कानून-2015) को पारित कर दिया. इससे देश की खुफिया एजेंसियों को अतिरिक्त बल प्राप्त होगा. इसके पक्ष में 183 मत पड़े जबकि विरोध में केवल 96 वोट डाले गए.
यह अधिनियम कनाडा की ख़ुफ़िया सेवा एजेंसी (सीएसआईएस) को विदेशों में भी कार्य करने का अधिकार प्रदान करेगा. इसके पारित होने पर पुलिस बिना किसी आरोप के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है.
अब इस बिल को सीनेट के पास सहमति के लिए भेजा जायेगा.
आतंकवाद विरोधी कानून की विशेषताएं
इस कानून के लागू होने पर संदिग्ध व्यक्ति को सात दिन तक हिरासत में रखा जा सकता है.
यह कानून सीएसआईएस के अधिकार क्षेत्र को विस्तार प्रदान करेगी तथा किसी भी हमले की स्थिति में प्रत्यक्ष रूप से जवाब देने का अधिकार रखेगी.
इसके अतिरिक्त सीएसआईएस को संदिग्ध व्यक्तियों तक स्वयं पहुंचने का अधिकार हासिल हो जायेगा. वर्तमान समय में ख़ुफ़िया एजेंसी को जानकारी एकत्रित करके पुलिस को सूचित करना पड़ता है.
सीएसआईएस को संदिग्ध व्यक्ति की विमान यात्रा अथवा किसी भी यात्रा के आरक्षण को रद्द करने का अधिकार प्राप्त हो जायेगा. हालांकि सीएसआईएस को किसी भी नयी योजना के क्रियान्वन से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी.
कनाडा पर किसी भी तरह के आतंकी हमले या हमले के लिए उकसाने को अपराध समझा जायेगा.
सार्वजानिक धमकी की अधिकतम सज़ा पांच वर्ष होगी.
किसी भी केनेडियन वेबसाइट पर आतंकवाद संबंधित सामग्री को हटाने या प्रतिबंधित करने का अधिकार भी एजेंसी को मिलेगा.
कनाडा में 22 अक्टूबर 2014 को हुए आतंकवादी हमले के बाद जनवरी 2015 को कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने जनवरी 2015 को आतंकवाद विरोधी बिल की घोषणा की थी.
इस घटना में एक हथियारबंद हमलावर, मिशेल ज़ेहफ़-बिबेयू ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में एक सैनिक की हत्या कर दी. इसके बाद जब वह संसद की ओर बढ़ने लगा तो पुलिस से उसे मार गिराया.

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