प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 मई 2015 को पीएसएलवी-C50 और पीएसएलवी-C36 की 15 उड़ानों को अनुमति प्रदान करते हो ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) कार्यक्रम को जारी रखने का फैसला किया.
इस कार्यक्रम के अंतर्गत इन सभी पंद्रह परिचालन उड़ानों को 2017 से 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा. पीएसएलवी कार्यक्रम के जारी रहने से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पृथ्वी अवलोकन और नेविगेशन करने के अतिरिक्त अंतरिक्ष विज्ञान के उच्च स्तरीय अध्ययन में सक्षम हो जाएगा.
इसके अलावा यह मंजूरी भारत के लिए वाणिज्यिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कार्यक्रम के सफल आयोजन से चार से पाँच प्रक्षेपण प्रति वर्ष की माँग को पूरा करना अब भारत के लिए संभव होगा. इस कार्यक्रम को जारी रखने से सरकारी खजाने पर 3090 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा.
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) कार्यक्रम के बारे में
• यह कार्यक्रम 2008 में केंद्र सरकार द्वारा मंजूर किया गया था.
• इस कार्यक्रम से भारत पृथ्वी अवलोकन, आपदा प्रबंधन, अंतरिक्ष विज्ञान और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हुआ है.
• पीएसएलवी एक बहुमुखी प्रक्षेपण यान क्योंकि इससे भू-स्थैतिक कक्षा, सौर्य-स्थैतिक कक्षा और पृथ्वी की निचली कक्षा तक नातिभर ले जाना संभव है.
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