गैर–संचारी रोग 2014 पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक स्थिति रिपोर्ट जारी की

Jan 21, 2015, 17:30 IST

19 जनवरी 2015 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गैर–संचारी रोग पर वैश्विक स्थिति  रिपोर्ट जारी की.

19 जनवरी 2015 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गैर–संचारी रोग पर वैश्विक स्थिति  रिपोर्ट जारी की.

रिपोर्ट के मुताबिक हर वर्ष 16 मिलियन लोग हृदय और फेफड़े की बीमारियों, स्ट्रोक, कैंसर और मधुमेह की वजह से 70 वर्ष से पहले ही मौत के शिकार हो जाते हैं. इनमें से अधिकांश बीमारियां रोकी जा सकती हैं.

डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार एक वर्ष के लिए वैश्विक गैर– संचारी बीमारियों (एनसीडी) को कम करने की लागत 11.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. साल 2011 से 2025 तक एनसीडी की वजह से कम और मध्यम आय वाले देशों में होने वाला संचयी आर्थिक नुकसान का अनुमान 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का है.

प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष सिर्फ 1 से 3 अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ देश आश्चर्यजनक रूप से गैर– संचारी रोगों से होने वाली बीमारियों और मौतों को रोक सकते हैं.

रिपोर्ट 194 देशों में एनसीडी मृत्यु दर (2012) और जोखिम कारकों पर आधारित सबसे वर्तमान अनुमान देती है. रिपोर्ट में एक्शन प्लान  के 9 वैश्विक स्वैच्छिक लक्ष्यों को रेखांकित किया गया है जो एनसीडी के प्रमुख जोखिम कारकों को संबोधित करेंगें. इसमें तंबाकू का प्रयोग, नमक का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, भौतिक निष्क्रियता, उच्च रक्त चाप और शराब का हानिकारक प्रयोग शामिल है.

एनसीडी के 9 वैश्विक लक्ष्य हैं–

1. कैंसर, मधुमेह, क्रॉनिक श्वसन रोगों से होने वाली असमय मौत के जोखिम को 25 फीसदी तक कम करना.
2. राष्ट्रीय संदर्भ में शराब के हानिकारक इस्तेमाल में कम– से– कम 10 फीसदी कमी.
3. अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि के प्रसार में 10 फीसदी की सापेक्ष कमी
4. नमक के सेवन में 30 फीसदी की सापेक्ष कमी.
5. 15 वर्ष से अधिक के लोगों द्वारा तंबाकू के इस्तेमाल में 30 फीसदी की सापेक्ष कमी लाना
6. राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार उच्च रक्त चाप की व्यापकता में 25 फीसदी की कमी लाना
7. मधुमेह और मोटापे में बढ़ोतरी को रोकना।
8. कम–से–कम 50 फीसदी सक्षम लोगों को हृदयाघात और स्ट्रोक से बचाने के लिए दवा मुहैया कराना.
9. सरकारी और निजी दोनों ही प्रकार के अस्पतालों में प्रमुख एनसीडी के उपचार हेतु किफायती बुनियादी तकनीक एवं अनिवार्य दवाओं की 80 फीसदी उपलब्धता.

रिपोर्ट की मुख्य बातें–

• साल 2012 में एनसीडी से हुईं 38 मिलियन मौतों में 16 मिलियन या 42 फीसदी असमय या रोके जाने योग्य मौतें थीं, साल 2000 में यह आंकड़ा 14.6 मिलियन का था.
• एनसीडी से होने वाली असमय मौत को सरकार की नीतियों के जरिए बहुत हद तक कम किया जा सकता है. जैसे तंबाकू के प्रयोग, शराब के हानिकारक इस्तेमाल, अस्वास्थ्यकर भोजन और शारीरिक निष्क्रियता को कम कर एवं सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा मुहैया करा कर.
• महामारी को रोकने के लिए रिपोर्ट में और अधिक प्रयास किए जाने की बात कही गई है. खासतौर पर कम एवं मध्यम आय–समूह वाले देशों में जहां एनसीडी की वजह से होने वाली मौतें संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना में अधिक है.

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट

• एनसीडी के 2013– 2020 लक्ष्यों के लिए ग्लोबल एक्शन प्लान के निगरानी कार्यान्वयन के लिए बेसलाइन मुहैया कराती. लक्ष्य 2025 तक एनसीडी से होने वाली असमय मौत की संख्या को 25 फीसदी तक कम करना है.
• हालांकि कुछ देश एनसीडी के वैश्विक लक्ष्यों की तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन ज्यादातर देश 2025 के लक्ष्य को शायद ही पूरा कर पाएं. दिसंबर 2013 तक सिर्फ 70 देशों के पास वैश्विक एनसीडी एक्शन योजना की तर्ज पर चालू राष्ट्रीय एनसीडी योजना थी.
• कम औऱ मध्यम आय वाले देशों में खासतौर पर मौत एवं बीमारी की उच्च दर एनसीडी में अपर्याप्त निवेश की वजह से है.

रिपोर्ट में सूचीबद्ध क्षेत्रीय लागत प्रभावी सफलताएं

तुर्की तंबाकू कमी के लिए सबसे बेहतरीन खरीद उपायों को लागू करने वाला पहला देश था. साल 2012 में देश ने कवर पर स्वास्थ– चेतावनी लेबलों का आकार बढ़ाकर हर एक तंबाकू उत्पाद के कुल सतह क्षेत्र का 65 फीसदी कर दिया था. यहां अभी भी तंबाकू के विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध है.

हंगरी ने चीनी, नमक और कैफीन जैसे स्वास्थ्य के लिए उच्च जोखिम वाले खाद्य एवं पेय सामग्रियों पर कर लगाने के लिए कानून पास किया. करीब 40 फीसदी निर्माताओं ने कर को कम करने के लिए अपने उत्पाद के फॉर्मूला बदल दिए.

अर्जेंटीना, ब्राजील, चीलि, कनाडा, मैक्सिको औऱ अमेरिका ने डिब्बाबंद खाद्य सामग्रियों और ब्रेड में नमक के प्रयोग को कम करने को प्रोत्साहित किया. अर्जेंटीना ने ब्रेड में 25 फीसदी तक नमक कम करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है.

साल 1993 में, फिनलैंड ने अनिवार्य नमक चेतावनी लेबल और अधिक नमक स्तर वाले उत्पादों पर चेतावनी लेबलों की जरूरत को अनिवार्य बना दिया था. फिनलैंड में महिलाओं में नमक की दैनिक खपत जो 1970 के दशक के आखिर में 12 जी/ दिन थी वह कम होकर 2002 के अंत में 6.8 जी/दिन तक रह गई.

Jagran Josh
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Education Desk

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