चीन ने 24 मार्च 2015 को प्रदूषण में कटौती करने के उद्देश्य से 845 मेगावाट (मेगावाट) के अपने आखरी कोयला आधारित बिजली संयंत्र को बंद करने की घोषणा की है. यह बिजली संयंत्र बीजिंग में स्थित है जिसका संचालन हुएनेंग समूह द्वारा किया जा रहा है. इस बिजली संयंत्र को अब गैस आधारित बिजली संयंत्र के रूप में परिवर्तित किया जाएगा.
यह चीन द्वारा बंद किया गया चौथा प्रमुख कोयला आधारित बिजली संयंत्र होगा इससे पहले चीन तीन कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को बंद कर चुका है.
• ग्योहुआ इलेक्ट्रिक पावर कार्पोरेशन के स्वामित्व वाला कोयला आधारित बिजली संयंत्र मार्च 2015 के तीसरे सप्ताह में बंद किया जा चुका है.
• बीजिंग ऊर्जा निवेश होल्डिंग कंपनी के स्वामित्व वाला कोयला आधारित बिजली संयंत्र मार्च 2015 के तीसरे सप्ताह में बंद किया जा चुका है.
• डाटांग कॉर्प के स्वामित्व वाले कोयला आधारित बिजली संयंत्र जुलाई 2014 में बंद किया जा चुका है.
इन चार प्रमुख कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को गैस आधारित बिजली संयंत्रों में परिवर्तित किया जाएगा जो कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की तुलना में 2.6 गुना अधिक बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम होंगे.
सभी प्रमुख कोयला विद्युत संयंत्रों के बंद होने के साथ चीन में 30 मिलियन टन का कार्बन उत्सर्जन में कटौती का अनुमान है जिससे प्रत्येक वर्ष 9.2 मिलियन मीट्रिक टन कोयला उपयोग में कमी आएगी.
दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देश चीन ने अपनी राष्ट्रीय नीति में वार्षिक कोयले की खपत में वर्ष 2017 तक 13 लाख मीट्रिक टन की कटौती करने की घोषणा की है.
चीन में वायु प्रदूषण चीनी अधिकारियों के लिए प्रमुख पर्यावरणीय समस्या बना हुआ जो मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम बना हुआ है. 161 शहरों में से 90 प्रतीशत शहर वायु गुणवत्ता के सरकारी मनको को प्राप्त करने में विफल रहे हैं.
सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का समापन चीन द्वारा प्रदूषण में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मन जा रहा है चीन अपनी ऊर्जा का 64 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन से प्राप्त करता है.

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