जांजीबार के राष्ट्रपति डॉ. अली मोहम्मद शीन 1 से 9 फरवरी 2014 तक भारत की सरकारी यात्रा पर आए. वे भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के निमंत्रण पर भारत आए. अली मोहम्मद शीन अपनी पत्नी सहित एक 28-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की अगुआई कर रहे हैं.
इस दौरे के दौरान वे 1 फरवरी 2014 को अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ राजस्थान का आमेर किला देखने गए. उन्होंने और उनके प्रतिनिधिमंडल ने शीश महल, मानसिंह महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास और किला-परिसर के अन्य स्थानों का भी दौरा किया. प्रतिनिधिमंडल राज्य के दो दिन के दौरे पर था.
राज्य के दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल राजस्थान के अजमेर स्थित बेयरफुट कॉलेज भी गया, जिसने उनके देश की 100 महिलाओं को सोलर लैंप बनाना सिखाया है. बेयरफुट कॉलेज ने भारत के आईटीईसी कार्यक्रम के तहत जांजीबारी महिलाओं को प्रशिक्षित किया है. राष्ट्रपति ने कॉलेज में उपलब्ध सुविधाएँ देखने के लिए कॉलेज का दौरा किया, ताकि जांजीबार में भी वैसा ही प्रशिक्षण-कॉलेज स्थापित कर सकें.
आशा की जाती है कि इस यात्रा के दौरान जांजीबार के राष्ट्रपति औद्योगिक और व्यावसायिक नेताओं तथा तंजानियाई समुदाय से मिलने बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद भी जाएँगे. जांजीबार के राष्ट्रपति का यह दौरा उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति के ऐसे दौरे के लगभग एक दशक बाद हुआ है.
भारत और जांजीबार के बीच एक मजबूत ऐतिहासिक संबंध रहा है. जांजीबार द्वीपसमूह में सदियों पुराने भारतीय प्रवासी मौजूद हैं.
जांजीबार के बारे में
जांजीबार एक द्वीपसमूह है, जो जांजीबार और पेंबा द्वीपों तथा अनेक द्वीपिकाओं (आइलेट्स) से मिलकर बना है. यह हिंद महासागर में तंजानियाई तट से लगभग 25 मील दूर और भूमध्यरेखा से 6° दक्षिण में स्थित है. इसकी विशेषताओं में शामिल हैं कोरल की सीमांत समुद्री चट्टानों वाले सुंदर रेतीले समुद्र-तट और ऐतिहासिक पत्थरों के शहर का जादू — जो पूर्वी अफ्रीका में अकेला कार्यशील प्राचीन शहर बताया जाता है. जांजीबार पूर्वी अफ्रीका में तंजानिया का अर्ध-स्वायत्त भाग है. फ़ारसी में 'जांजीबार' का अर्थ 'काला तट' (जांजी या जैंगी = काला और बार = तट) होता है.
जांजीबार द्वीपसमूह की जनसंख्या नृजातीय पृष्ठभूमियों का एक अविश्वसनीय मिश्रण है, जिसमें इस्लाम मुख्य धर्म है और अधिकतर जांजीबारी लोगों द्वारा उसका पालन किया जाता है. साथ ही, वहाँ ईसाई और हिंदू धर्म के अनुयायी भी हैं. जांजीबारी जनसंख्या स्वाहिली (स्थानीय नाम किस्वाहिली) भाषा बोलती है, जो पूर्वी अफ्रीका में बड़ी संख्या में बोली जाती है. अनेक लोगों का मानना है कि इस भाषा का शुद्धतम रूप जांजीबार में ही बोला जाता है, क्योंकि यही इस भाषा का जन्म स्थान है.
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