पुणे का फर्ग्यूसन कॉलेज 26 जून 2014 को अपने अकादमिक पाठ्यक्रमों वाले आवेदन फॉर्म में तीसरे लिंग के लिए श्रेणी बनाने वाला देश का सबसे पहला कॉलेज बन गया. ये पाठ्यक्रम 2014– 15 सत्र में शुरु होंगे.
बी.ए. प्रथम वर्ष (एफवाईबीए) और बीएससी (एफवाईबीएससी) के लिए आवेदन फॉर्म ऑनलाइन उपलब्ध हैं और इनमें तीसरे लिंग का विकल्प भी है. कॉलेज प्रशासन का यह फैसला अप्रैल 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीसरे लिंग को मान्यता देने के बाद लिया गया है.
कॉलेज की योजना जागरूकता और लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम बनाने की भी है ताकि यह कागजों तक की सीमित नहीं रहे.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में
16 अप्रैल 2014 को जस्टिस के. एस. राधाकृष्णन और ए. के.सीकरी की पीठ ने फैसला दिया था कि दो लिंगो से अलग किन्नरों को तीसरा लिंग माना जाए. पीठ ने यह फैसला हमारे संविधान एवं संसद और राज्य विधानमंडल द्वारा इनके हितों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए किया था. यह फैसला राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से दायर एक याचिका पर आया है.
इस पीठ ने केंद्र और राज्यों को इन्हें सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़ा वर्ग की तरह मानने और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले एवं सार्वजनिक नियुक्तियों में आरक्षण को बढ़ाने का निर्देश दिया है.
पीठ ने कहा कि किन्नरों को तीसरे लिंग की तरह मान्यता प्रदान करना सामाजिक या चिकित्सीय मुद्दा नहीं बल्कि मानवाधिकार का मुद्दा है. किन्नर भी भारतीय नागरिक हैं. हमारा संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म या लिंग से हटकर आगे बढ़ने और अपनी क्षमता को प्राप्त करने का एक समान अवसर मुहैया कराने की बात करता है.
इस फैसले के आधार पर, सभी पहचान दस्तावेजों जिसमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल है, में तीसरे लिंग की पहचान को मान्यता देंगे.
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