बासेल समिति ने ग्राहकों के लिए बैंकों के ऋण जोखिम पर अंकुश लगाने के लिए अंतिम मानक जारी किए

Apr 17, 2014, 14:43 IST

बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बनी बासेल समिति ने 15 अप्रैल 2014 को ग्राहकों के लिए बैंकों के बड़े जोखिम को मापने और नियंत्रित करने के लिए अंतिम मानक जारी किए.

बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बनी बासेल समिति ने 15 अप्रैल 2014 को ग्राहकों के लिए बैंकों के बड़े जोखिम को मापने और नियंत्रित करने के लिए अंतिम मानक जारी किए. ये मानक 1 जनवरी 2019 से प्रभावी होंगे. बासेल समिति में लगभग तीस देशों के बैंकिंग पर्यवेक्षक शामिल थे.

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बासेल समिति ने एक नया नियम बनाया जिसके तहत बैंक को एक ग्राहक के साथ कारोबार करने की सीमा तय की गई है.

बासेल समिति के दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें

•    दिशा-निर्देशों का उद्देश्य प्रतिपक्ष द्वारा वित्तीय फर्मों पर अत्यधिक बोझ थोपने के जोखिम को कम करना है.

•    फ्रेमवर्क इस तरह से तैयार किया गया है कि इस प्रकार के डिफॉल्ट से बैंक की अधिकतम संभावित नुकसान के बावजूद बैंक के अस्तित्व को खतरा पैदा नहीं हो.

•    अगर बैंक का प्रतिपक्ष कोई दूसरा बैंक है तो उस मामले में, बड़ा जोखिम सीमा सिस्टम–वाइड कॉन्टैगिनेशन रिस्क (प्रणाली में फैली व्यापक जोखिम) में सीधा योगदान देगा.

•    यह फ्रेमवर्क फंड में निवेश के कवरेज का दायरा बढ़ा कर, प्रतिभूमति संरचनाओं और सामूहिक निवेश उपक्रमों के जरिए शैडो बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और उसके नियमन में भी योगदान करेगा.

•    मौजूदा नियम के मुताबिक पर्यवेक्षकों को जोखिम पर 25 फीसदी की कैप लगाने की इजाजत देता है जिसका मतलब है कि प्रत्येक जोखिम बैंक के कुल नियामक कैपिटल होल्डिंग्स से एक तिमाही से अधिक नहीं हो सकता.

•    बैंकों के बीच ग्लोबल सिस्टेमिकली इंपॉर्टेंट बैंक्स (जी–एसआईबी) सख्त सीमा लागू होगी. यह सीमा टीयर 1 पूंजी का 15 फीसदी रखा जाएगा.

•    साल 2016 तक समिति समाशोधन से संबंधित केंद्रीय प्रतिपक्ष योग्यता जोखिम (क्यूसीसीपी) के लिए निर्धारित जोखिम सीमा के औचित्य की समीक्षा करेंगें, जिसे फिलहाल छूट दी गई है.

•    यह मौद्रिक नीति के कार्यान्वयन पर बड़े जोखिम फ्रेमवर्क के प्रभाव की भी समीक्षा करेगी.

•    समिति इस बात की भी समीक्षा करेगी कि क्या यह सीमा क्लीयरिंग हाउसेस से बैंक के जोखिम पर सेट किया जाना चाहिए, फिलहाल नहीं किया जाता, जिसे साल 2016 तक नए परिचालन मानकों को अपनाना होगा.

इसके अलावा, अंतिम मानक ने माप औऱ नियंत्रण संबंधित अपने प्रारंभिक प्रस्तावों में संशोधन किया है. वे हैं–

•    परिभाषा और रिपोर्टिंग थ्रेस्होल्ड अब योग्य पूंजी आधार का 10 फीसदी होगा (पहले 5 फीसदी प्रस्तावित था).

•    क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (सीडीएस) की सीमित रेंज, जो ट्रेडिंग बुक में हेज के रूप में इस्तेमाल होता था, को संशोधित किया जाएगा ताकि यह जोखिम आधारिक पूंजी फ्रेमवर्क के साथ अधिक निकटता से जुड़ सके.

•    प्रतिभूतिकरण वाहनों के निवेश के लिए आरंभ में प्रस्तावित विघटन सीमा (पूंजी आधार की 0.25 फीसदी से अंशशोधित) को बैंक के पूंजी आधार से संबंधित मैटेरियलिटी थ्रेस्होल्ड से प्रतिस्थापित किया गया है.

•    कुछ कवर्ड बॉन्ड्स की विशेष सुविधाओं को मान्यता प्रदान की जाएगी.

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