विश्व बैंक ने बिहार को कोसी आपदा पीडि़तों के लिए (Bihar Koshi Recovery Project) 1000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया. विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जोएलिक और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में इसके हेतु सहमति पत्र पर 12 जनवरी 2011 को हस्ताक्षर हुए. सहमति पत्र के अनुसार अगस्त 2008 में कोशी नदी में आए बाढ़ से प्रभावित 100000 लोगों के घरों को बनाने के लिए प्रति घर 55000 रुपये की राशि दी जाएगी. साथ ही बाढ़ से टूटी 290 किमी सड़कों और 90 पुल-पुलियों को दुरुस्त किया जाना भी शामिल है.
सहमति के अनुसार बिहार कोशी रिकवरी प्रोजेक्ट में बिहार सरकार को 390 लाख डॉलर का खर्च उठाना है. 55000 हजार रुपये प्रति घर के अलावा शौचालय और सौर ऊर्जा के लिए प्रत्येक घर को क्रमशः 2300 और 5000 रुपये दिया जाना है.
विश्व बैंक ने बिहार सरकार बाढ़ प्रबंधन क्षमता में विकास, आपात स्थिति में त्वरित कार्यबल के लिए प्रबंधन आदि के विकास के लिए कुल 4500 करोड़ रुपये कर्ज देने का भी वायदा किया.
बिहार बाढ़ 2008: भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल के कुशा जगह पर 18 अगस्त 2008 को कोशी नदी तटबंध के कट जाने से बिहार में भीषण बाढ़ आई थी. बिहार के सुपौल, अररिया, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, भागलपुर और पश्चिमी चंपारण जिले के लगभग 2300000 लोग प्रभावित हुए थे. 500 से ज्यादा लोगों की मृत्यु भी हुई थी.
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