बंबई उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की दो परिसंपत्तियों की कुर्की किए जाने का आदेश 28 दिसंबर 2010 को दिया. यह आदेश संजय दत्त और फिल्म निर्माता शकील नूरानी के बीच वित्तीय विवाद के मामले में दिया गया. इस विवाद पर इंडियन मोशन पिक्र्चस प्रोड्यूर्सस एसोसिएशन (आईएमपीपीए) ने जनवरी 2010 में फैसला सुनाया था. आईएमपीपीए ने अपने इसी फैसले को लागू कराने के लिए बंबई उच्च न्यायालय में अपील की थी. जिस पर उच्च न्यायालय के क्रियान्वयन विभाग ने दीवानी प्रक्रिया संहिता के तहत दिसंबर 2010 के तीसरे सप्ताह में संजय दत्त के खिलाफ वारंट जारी किया था.
विदित हो कि नूरानी ने इस अभिनेता पर 2.03 करोड़ रुपए का दावा किया है, जिसमें फिल्म जान की बाजी के लिए दी गई 50 लाख रुपए की राशि भी शामिल है. वर्ष 2002 में शुरू की गई शकील नूरानी की फिल्म जान की बाजी को संजय दत्त ने बीच में ही छोड़ दिया था.
सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन और आईएमपीपीए के बीच एक समझौते के तहत आईएमपीपीए को पंच के रूप में कार्य करने की शक्ति प्राप्त है. जो फिल्मों से संबंधित इस तरह के वित्तीय विवादों का निपटारा करती हैं.
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