वर्ष 2013–14 में छह वर्षों के अंतराल के बाद भारत निवल इस्पात निर्यातक बन गया. केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की इकाई संयुक्त प्लांट समिति (जेपीसी) के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत का कुल इस्पात निर्यात 5.59 मिलियन टन (एमटी) रहा, जबकि आयात 5.44 एमटी था. भारत में इस्पात की खपत में 0.6 फीसदी (2013– 14 में) का इजाफा हुआ और यह 73.93 एमटी तक पहुंच गया.
निर्यात में 4.1 फीसदी की वृद्धि और आयात में 31.3 फीसदी की गिरावट ने भारत को एक बार फिर से निवल इस्पात निर्यातक बनने में मदद की. रूपये की अस्थिरता औऱ मांग–आपूर्ति अनुपात का कम होना ने अधिक निर्यात को बढ़ावा दिया औऱ धीमी घरेलू अर्थव्यवस्था ने घरेलू मांग में कमी लाई जिससे आयात लागत में कमी हुई.
यही प्रवृत्ति वित्त वर्ष 2014–15 में जारी रहने की उम्मीद है क्योंकि निजी और सरकारी दोनों ही निर्मात घरेलू मांग की क्षतिपूर्ति के लिए अधिक निर्यात का लक्ष्य तय कर रहे हैं. राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) ने पिछले वर्ष एक लाख टन इस्पात का निर्यात किया था. इस वित्त वर्ष में इसके तिगुना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी तरह, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) ने निर्यात में 2013– 14 में 30 फीसदी वृद्धि दर्ज की और 2014– 15 में इसे दुगुने से भी अधिक का लक्ष्य रखा है.
पृष्ठभूमि
फिलहाल, भारत चौथा सबसे बड़ा इस्पात निर्माता है. साल 2007– 08 से 2012– 13 तक भारत इस्पात का आयात करता था. देश के कुल इस्पात मांग का करीब 60 फीसदी निर्माण क्षेत्र में जाता है औऱ करीब 15 फीसदी ऑटोमोबाइल क्षेत्र उपयोग करता है.
जेपीसी के बारे में
जेपीसी भारतीय इस्पात उद्योग के डेटाबैंक को बनाने और उसके रखरखाव, इस उद्योग के आंकड़े इक्ट्ठे करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्था है.इसका मुख्यालय कोलकाता में हैं और इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय– दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में हैं.

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